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सुरक्षा को अनदेखा कर नियम विरुद्ध मेन रोड पर डिवाइडरों के बीच खड़े किए पांच अवैध यूनिपोल 91 वैध होर्डिंग के बीच में पांच यूनिपोल लगाने के खेल में नगरपालिका ने हर जगह उड़ाई नियमों की धज्जियां

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सुरक्षा को अनदेखा कर नियम विरुद्ध मेन रोड पर डिवाइडरों के बीच खड़े किए पांच अवैध यूनिपोल

91 वैध होर्डिंग के बीच में पांच यूनिपोल लगाने के खेल में नगरपालिका ने हर जगह उड़ाई नियमों की धज्जियां

सांध्य दैनिक खबरवाणी, बैतूल

बैतूल नगरपालिका सरकार द्वारा बनाए गए टेंडर प्रक्रिया के नियमों से छेड़छाड़ तो कर रही है, लेकिन इसके साथ ही लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने में पीछे नहीं हट रही है। इसका जीता जागता उदाहरण शहर में लगाए गए पांच अवैध यूनिपोल हैं। दरअसल नगरपालिका सीएमओ की मनमर्जी के कारण टेंडर की शर्तों में हेरफेर तो चल रही रहा है, लेकिन इसमें सरकार द्वारा बनाए गए सख्त नियमों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। पहली बात तो यह है कि 5 लाख की आबादी वाली शहर में ही यूनिपोल लगाए जाते हैं, जबकि बैतूल शहर की जनसंख्या फिलहाल दो लाख के आस-पास ही है, इसलिए यूनिपोल बैतूल शहर में नहीं लगाए जा सकते बावजूद इसके नियमों को दरकिनार कर और स्वयं नगरपालिका परिषद बैतूल के टेंडर की शर्तों को स्वयं की मर्जी से तोड़ मरोडक़र टेंडर प्रक्रिया के पूर्व और टेंडर प्रक्रिया के पश्चात छेड़छाड़ की गई।
जून 2025 में आरएफपी नं. 2025-यूएडी-428652-1 के माध्यम से नगर निगम भोपाल द्वारा यूनिपोल स्थापित करने के लिए निविदा आमंत्रित की गई थी। जिसकी लगभग दो दर्जन शर्तों का नगरपालिका परिषद बैतूल द्वारा उल्लंघन किया गया, इस पर नगरपालिका सीएमओ सतीश मटसेनिया से जब चर्चा की तो उन्होंने जवाब में कहा कि मैं सब नियमों के तहत कर रहा हूं अर्थात नगरनिगम भोपाल द्वारा नियमों के विरुद्ध निविदा आमंत्रित की जा रही है। पहले तो बैतूल शहर में यूनिपोल की स्थापना नहीं हो सकती और अगर नियम के विरुद्ध स्थापना कर भी दी गई तो सडक़ की चौड़ाई के अनुरूप यूनिपोल की स्थापना की जाती है और डिवाइडर के बीच यूनिपोल स्थापित नहीं किए जा सकते, जबकि नगर में सभी पांचों यूनिपोल सडक़ के डिवाइडर के बीच में डिवाइडर के सहारे खड़े किए गए हैं।
नगर निगम भोपाल की निविदा शर्तों में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि यूनिपोल पर बिजली की आवश्यकता है तो निविदाकर्ता को स्वयं के व्यय पर कनेक्शन लेना होगा एवं बिल का भुगतान सीधे बिजली कंपनी को करना होगा, जबकि बैतूल में नगरपालिका द्वारा लगाई गई स्ट्रीट लाइट से सीधे कनेक्शन दे दिया गया है और यूनिपोल पर अतिरिक्त मीटर नहंी लगाया गया है, जिससे यह मालूम करना असंभव है कि यूनिपोल पर कितनी बिजली की खपत हुई और उसका कितना भुगतान होना है। निविदा की शर्तों के अनुसार निविदाकर्ता को प्रत्येक यूनिपोल का बीमा भी अनिवार्य रूप से कराना होगा और बीमा अनुबंध के दस्तावेज समय सीमा समाप्त होने से पूर्व रिनिवल भी करना होगा। बैतूल में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। ज्ञात हो कि मुुंबई, नोएडा जैसे महानगरों में यूनिपोल गिरने के मामले सामने आए हैं जिनमें जनहानि के अलावा शासकीय संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा था। ऐसा महसूस होता है कि सिर्फ होर्डिंग की निविदा ही नहीं बल्कि अन्य मामलों में भी नगरपालिका परिषद बैतूल के अपने बनाए नियम हैं, जिनका पालन नगरपालिका परिषद को करना पड़ रहा है। चूंकि सीएमओ नगरपालिका द्वारा न तो नगरपालिका अध्यक्ष, परिषद अथवा पार्षदों को तवज्जो दी जा रही है। नगरपालिका अध्यक्ष और पार्षदगणों से किसी भी विषय पर जानकारी प्राप्त करने के लिए संपर्क किया जाए तो उनका सीधा जवाब होता है हमें नहीं मालूम सीएमओ से पता करना पड़ेगा और यह बात प्रमाणित भी होती है क्योंकि सीएमओ द्वारा अधिकतर मामलों में परिषद की अनुमति के बिना ही फैसले ले लिए जाते हैं। नगरपालिका अध्यक्ष पार्वतीबाई बारस्कर से इस विषय पर चर्चा की तो उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है मैं सोमवार सीएमओ से इस मामले पर चर्चा करूंगी।
यूनिपोल पर बिजली कनेक्शन के संबंध में नगरपालिका उपाध्यक्ष महेश राठौर का कहना है कि निविदाकर्ता को बिजली का कनेक्शन स्ट्रीट लाइट से देने का कोई निर्णय परिषद में नहीं किया गया है, जबकि सीएमओ के मुताबिक परिषद के निर्णय के पश्चात ही कनेक्शन दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष राजकुमार दीवान का कहना है कि जिस तरह से नगरपालिका सीएमओ काम कर रहे हैं इस तरह से नियम विरुद्ध पूर्व में किसी अन्य सीएमओ को काम करते नहीं देखा।

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