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I-PAC पर बड़ा फर्जीवाड़ा? ₹13.5 करोड़ का कर्ज जिस कंपनी से लिया, वह निकली ही फर्जी

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I-PAC: चुनावी रणनीति बनाने वाली मशहूर कंपनी I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। ईडी की कोलकाता रेड के बाद अब एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक I-PAC ने जिस कंपनी से ₹13.5 करोड़ का लोन लेने का दावा किया है, वह कंपनी सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं है।

किस कंपनी से लिया गया था कर्ज?

I-PAC के दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी ने 17 दिसंबर 2021 को रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी से ₹13.50 करोड़ का लोन लिया था। इस कंपनी का पता हरियाणा के रोहतक स्थित अशोका प्लाजा बताया गया था। लेकिन जब इस पते की जांच की गई, तो वहां पिछले छह सालों से ऐसी कोई कंपनी मौजूद नहीं पाई गई।

2018 में ही बंद हो चुकी थी कंपनी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (ROC) के रिकॉर्ड से अगस्त 2018 में ही हटा दिया गया था। यानी जिस कंपनी से 2021 में लोन लेने का दावा किया गया, वह उससे करीब तीन साल पहले ही अस्तित्व में नहीं थी।

पूर्व शेयरधारकों ने लेन-देन से किया इनकार

इस कंपनी के सभी छह पूर्व शेयरधारकों – विक्रम मुंजाल, संदीप राणा, विजेंद्र, बलजीत जांगड़ा, प्रदीप कुमार और जगबीर सिंह – ने साफ कहा है कि उन्होंने कभी I-PAC को कोई कर्ज नहीं दिया। उनका कहना है कि यह कंपनी जमीन के कारोबार के लिए बनाई गई थी, लेकिन काम न चलने की वजह से इसे जल्द ही बंद कर दिया गया था।

I-PAC का दावा और नया सवाल

I-PAC ने 27 जून 2025 को एक बयान में कहा था कि उसने 2024-25 के दौरान ₹13.50 करोड़ के लोन में से ₹1 करोड़ चुका दिया है और अब ₹12.50 करोड़ बाकी है। लेकिन सवाल यह है कि जब कर्ज देने वाली कंपनी ही मौजूद नहीं थी, तो भुगतान किसे किया गया?

जवाब देने से बचते नजर आए अधिकारी

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब इस मामले पर I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन और कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो किसी ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इससे पूरे मामले पर संदेह और गहराता जा रहा है।

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I-PAC का बैकग्राउंड

I-PAC की स्थापना साल 2015 में पटना में हुई थी और 2022 में इसका ऑफिस कोलकाता शिफ्ट किया गया। फिलहाल ईडी इस पूरे लेन-देन की गहराई से जांच कर रही है।

कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ कर्ज का नहीं बल्कि संभावित फर्जीवाड़े और मनी ट्रेल से जुड़ा हुआ दिख रहा है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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