Hyperthyroidism की समस्या आजकल बेहद आम हो चुकी है, खासकर महिलाओं में। जब थायरॉयड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तो इसे हाइपरथायरॉयडिज्म (Hyperthyroidism) कहा जाता है। इस स्थिति में शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है और कई तरह के लक्षण दिखने लगते हैं। आइए समझते हैं कि शुरुआत में शरीर कौन से संकेत देता है और कौन लोग ज्यादा जोखिम में रहते हैं।
हाइपरथायरॉयडिज्म के शुरुआती लक्षण
जब थायरॉयड ग्रंथि बड़ी होने लगती है या ज्यादा एक्टिव हो जाती है, तो शरीर में कई तरह की परेशानियाँ दिखने लगती हैं:
- बिना मेहनत वजन कम होना
- भूख का अचानक बढ़ जाना
- दिल की धड़कन तेज होना
- दिल की धड़कन का अनियमित होना
- घबराहट, बेचैनी और चिड़चिड़ापन
- ज्यादा पसीना आना
- महिलाओं में पीरियड्स अनियमित होना
- गर्मी ज्यादा लगना
- मांसपेशियों में कमजोरी
- नींद की दिक्कत
- लगातार थकान महसूस होना
- त्वचा का हमेशा नम रहना
- त्वचा का पतला होना
- बालों का झड़ना या पतले होना
ये सभी संकेत बताते हैं कि थायरॉयड ओवरएक्टिव हो सकता है।
हाइपरथायरॉयडिज्म क्यों होता है?
थायरॉयड के ज्यादा एक्टिव होने के कई कारण हो सकते हैं:
अधिक आयोडीन लेना
अगर भोजन में आयोडीन ज्यादा हो जाए, तो थायरॉयड हार्मोन का उत्पादन बढ़ सकता है।
ग्रेव्स डिज़ीज़ (Graves’ Disease)
यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉयड को ज्यादा हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करता है। यह परिवार में भी चल सकती है।
थायरॉयड नोड्यूल्स
थायरॉयड ग्रंथि में गाँठें या सेल्स की अनियंत्रित वृद्धि हार्मोन उत्पादन बढ़ा सकती है।
थायरॉयडाइटिस
थायरॉयड ग्रंथि में सूजन आने पर कुछ समय के लिए हार्मोन ज्यादा बनने लगते हैं। सूजन कम होने पर स्थिति सामान्य भी हो सकती है।
किन लोगों में ज्यादा जोखिम है?
कुछ लोगों में हाइपरथायरॉयडिज्म होने का खतरा ज्यादा रहता है:
- महिलाएँ पुरुषों की तुलना में अधिक प्रभावित होती हैं
- 60 साल से ऊपर के लोग
- गर्भावस्था या प्रसव के बाद महिलाओं में थायरॉयड की समस्या बढ़ सकती है
- परिवार में थायरॉयड का इतिहास होने पर जोखिम ज्यादा
कब करें डॉक्टर से संपर्क?
अगर आपको लगातार वजन कम हो रहा है, दिल तेजी से धड़क रहा है, बहुत पसीना आता है या नींद नहीं आती—तो यह थायरॉयड का संकेत हो सकता है। समय रहते जांच करवाना जरूरी है।
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थायरॉयड की समय पर पहचान क्यों ज़रूरी?
अगर थायरॉयड समस्या समय पर पकड़ ली जाए, तो दवाइयों और थोड़े से लाइफस्टाइल बदलाव से इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। देर होने पर दिल की समस्या, हड्डियों की कमजोरी और अन्य जटिलताएँ बढ़ सकती हैं।





