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दुर्गा बस्ती–अहिल्या बस्ती में ऐतिहासिक संयुक्त हिंदू सम्मेलन
नर्मदापुरम /जिले के मालाखेड़ी क्षेत्र में रविवार को दुर्गा बस्ती एवं अहिल्या बस्ती के संयुक्त तत्वावधान में नगर का प्रथम हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। “भेदभाव की विदाई—हिंदू-हिंदू भाई” के संदेश के साथ हुए इस आयोजन में सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रबोध का सशक्त आह्वान किया गया। बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, योग–तबला कार्यक्रम और विचारोत्तेजक वक्तव्यों ने सम्मेलन को ऐतिहासिक बना दिया।
सम्मेलन का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में बच्चों ने संस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर भारतीय परंपरा और संस्कारों का संदेश दिया। योग एवं तबला की सशक्त प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संयोजन आरव दुबे द्वारा किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा।
मुख्य वक्ता के रूप में गुरुकुल परंपरा से जुड़े विद्वान वक्ता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि 27 सितंबर 1925 को बीज रोपण के साथ जो संकल्प लिया गया था, वही आज वर्तमान, भूत और भविष्य को दिशा दे रहा है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन के दौर में समाज को जाति, वेशभूषा और भोजन जैसी रेखाओं में बाँटकर कमजोर किया गया, जिससे हिंदू समाज बिखर गया। हमारे शास्त्रों और परंपराओं को विभाजित किया गया, जबकि गुरुकुल व्यवस्था में विद्यार्थी अध्ययनरत रहते हुए भिक्षा-भोजन से संस्कार ग्रहण करते थे। वक्ता ने आह्वान किया कि राष्ट्र रक्षा और हिंदू एकता के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य किया जाए।
पंडित अजय दुबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि “भेदभाव की विदाई—हिंदू-हिंदू भाई” आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विनम्रता हमारा गुण है, परंतु अन्याय को सहन करना कायरता है। गीता के 13वें अध्याय के श्लोक का संदर्भ देते हुए उन्होंने एकता, कर्तव्य और आत्मबोध पर प्रकाश डाला। उन्होंने इतिहास के उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि आपसी मतभेदों के कारण समाज कमजोर होता है और बाहरी शक्तियाँ इसका लाभ उठाती हैं। “हम जाति नहीं पूछते, पूजन करते हैं”—इस भाव के साथ उन्होंने सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
कार्यक्रम में नारी शक्ति पर भी प्रभावी वक्तव्य दिया। नारी शक्ति स्वयं भगवान का स्वरूप है और उसका अपमान किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं। उन्होंने समाज से महिलाओं के सम्मान और संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
गोधरा कांड पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने सामाजिक सौहार्द, सत्य और संवैधानिक मूल्यों के साथ राष्ट्रहित में सजग रहने की आवश्यकता रेखांकित की। 1965 के युद्ध का उदाहरण देते हुए वक्ता ने बताया कि कैसे राष्ट्र सेवा विभिन्न रूपों में संभव है—सीमा पर सैनिक और समाज में संगठनात्मक कार्य।
मंच संचालन कौशलेश तिवारी एवं आरती शर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन अजय दुबे द्वारा किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही। अंत में आयोजकों ने इसे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।





