खबरवाणी
स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़
खटारा वाहनों में पहुंच रहा मध्यान्ह भोजन, जिम्मेदारों की अनदेखी से बढ़ा खतरा
ज्ञानेश्वर तायडे
बुरहानपुर जिले में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर लापरवाही का मामला सामने आ रहा है। शहर के कई शासकीय स्कूलों में मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) की आपूर्ति ऐसे खटारा और नियमों के विपरीत चल रहे वाहनों से की जा रही है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।
अनुसार, जिन वाहनों से भोजन पहुंचाया जा रहा है, वे अत्यंत जर्जर अवस्था में हैं। इन वाहनों से निकलने वाला धुआं सीधे भोजन के बर्तनों और टंकियों तक पहुंचता है, जिससे भोजन की शुद्धता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
धुएं और धूल के बीच बच्चों का भोजन
कई वाहनों में भोजन ले जाने वाली डिक्की या टंकी खुली अवस्था में रखी जाती है। ऐसे में वाहन से निकलने वाला धुआं, सड़क की धूल और गंदगी सीधे भोजन में मिल रही है। यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालीन दुष्प्रभाव डाल सकती है।
ऐसे प्रदूषित वातावरण में रखा गया भोजन बच्चों में
पेट संबंधी बीमारियां
सांस की समस्याएं
फूड पॉइजनिंग
जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है।
वाहनों के दस्तावेजों पर भी सवाल
सूत्रों की मानें तो जिन वाहनों से मध्यान्ह भोजन की आपूर्ति हो रही है, यदि उनकी आरटीओ स्तर पर जांच की जाए तो कई वाहनों के
फिटनेस प्रमाण पत्र
बीमा
प्रदूषण प्रमाण पत्र
परमिट
या तो समाप्त पाए जाएंगे या नियमों के अनुरूप नहीं होंगे।
इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा इन वाहनों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
निगरानी तंत्र पर उठे सवाल
मध्यान्ह भोजन योजना केंद्र और राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण सामाजिक योजना है, जिसका उद्देश्य बच्चों को पोषण प्रदान कर स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाना है। लेकिन बुरहानपुर जिले में इस योजना की निगरानी व्यवस्था कमजोर दिखाई दे रही है।
जिम्मेदार अधिकारी मैदानी निरीक्षण नहीं करते
वाहन जांच की प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित है
बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती
जिसका खामियाजा सीधे-सीधे मासूम बच्चों को भुगतना पड़ सकता है।
अधिकारियों की चुप्पी चिंता का विषय
इस पूरे मामले में संबंधित विभागों और अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।
नियमों के अनुसार, मध्यान्ह भोजन ले जाने वाले वाहनों को
पूरी तरह बंद
साफ-सुथरा
प्रदूषण मुक्त
वैध दस्तावेजों से युक्त
होना अनिवार्य है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है।
जनहित में कार्रवाई की मांग
और सामाजिक संगठनों ने अधिकारी से मांग की है कि—
मध्यान्ह भोजन वाहनों की तत्काल जांच कराई जाए
खटारा और नियमविरुद्ध वाहनों को तुरंत हटाया जाए
दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए
बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं में कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए
मध्यान्ह भोजन योजना बच्चों के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ी है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही संविधान द्वारा प्रदत्त बच्चों के स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन है। अब यह जिम्मेदार अधिकारियों पर निर्भर करता है कि वे समय रहते ठोस कदम उठाते हैं या इस गंभीर मुद्दे को अनदेखा कर देते हैं।
मासूमों के स्वास्थ्य से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।





