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Gauri Pujan: परंपरा: श्रद्धालु सड़क पर लेटते हैं और उनके ऊपर से दर्जनों गायें दौड़ते हुए निकलती 

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Gauri Pujan: उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील के भिड़ावद गांव में दिवाली के अगले दिन आयोजित होने वाला पारंपरिक ‘गौरी पूजन’ एक अनूठी और रोमांचक परंपरा है। इस आयोजन के दौरान गांव में हजारों लोग इकट्ठा होते हैं, और यह आयोजन अद्वितीय उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।गौरी पूजन के अवसर पर उपवास रखने वाले श्रद्धालु सड़क पर लेटते हैं, और उनके ऊपर से दर्जनों गायें दौड़ते हुए निकलती हैं। ग्रामीणों का मानना है कि गायों के पैरों के नीचे आने से ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है और गांव में सुख-समृद्धि आती है। इस प्राचीन परंपरा को लेकर भिड़ावद के लोग विश्वास रखते हैं कि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए यह आयोजन विशेष महत्व रखता है।भिड़ावद गांव में सदियों पुरानी इस परंपरा का पालन किया जा रहा है। हालांकि, आयोजन के दौरान जोखिम भरा प्रतीत होने वाला यह मंजर आज तक कभी किसी हादसे में नहीं बदला है। यहां के ग्रामीणों का दावा है कि इस आयोजन में भाग लेने वाले किसी भी व्यक्ति को कभी चोट नहीं आई है। इस विश्वास और परंपरा के कारण प्रशासन ने भी कभी इस आयोजन पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास नहीं किया।

उपवास और भजन-कीर्तन की परंपरा

गांव के कुछ श्रद्धालु पांच दिन तक मंदिर में रहकर भजन-कीर्तन करते हैं और उपवास रखते हैं। दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा के दिन इन उपवासधारियों के ऊपर से गायें दौड़ती हैं। इस साल भी गांव के कुछ लोगों, जैसे लाखन अग्रवाल, राधेश्याम अग्रवाल, रामचंदर चौधरी, कमल मालवीय और सोनू सिसोदिया, ने उपवास रखा और इसी परंपरा में शामिल हुए।

विश्व भर में पशुओं से जुड़ी परंपराएं

पशुओं से जुड़े आयोजन केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विश्व के कई हिस्सों में देखे जाते हैं। भारत में जहां जल्लीकट्टू और बैलगाड़ी दौड़ जैसे आयोजन होते हैं, वहीं अन्य देशों में भी पशुओं का उपयोग विभिन्न खेलों और आयोजनों में किया जाता है। स्पेन की बुल फाइटिंग, अरब देशों की ऊंट दौड़ और अफगानिस्तान की मुर्गे की लड़ाई जैसे आयोजन प्रसिद्ध हैं। हालांकि इनमें से कई आयोजनों में दुर्घटनाएं भी होती हैं, लेकिन भिड़ावद के गौरी पूजन में आज तक ऐसी कोई घटना नहीं घटी है।इस आयोजन को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं और यह गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाए रखता है।

 source internet साभार…

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