अगर आप अपने जीवन में परेशान हैं और उस परेशानियों का अंत चाहते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. आप प्रतिदिन सुंदरकांड के दोहे का अनुसरण करें कहा जाता है सुंदरकांड में ऐसी शक्ति होती है, जिसका अनुसरण करने से हर मनोकामना पूरी होती है. वैसे तो सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित होता है. ठीक उसी प्रकार शनिवार और मंगलवार बजरंगबली हनुमान को समर्पित है. इस दिन हनुमान मंदिरों में भक्त हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा आराधना करते हैं. हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं तथा सुंदरकांड का अनुसरण करते हैं. ऐसी स्थिति में आज हम आपको सुंदरकांड के दोहे के बारे में बताएंगे, जिसका अनुसरण करने से हनुमान जी महाराज की विशेष कृपा प्राप्त होगी .
दरअसल रामचरितमानस के सुंदरकांड में कई ऐसे दोहे बताए गए हैं, जिसका अनुसरण करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं. ऐसा ही एक दोहा ‘पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार, अति लघु रूप धरौं निसि नगर करौं पइसार’… जिसमें हनुमान जी महाराज के विचारों का वर्णन किया गया है इसके बारे में शशिकांत दास विस्तार से बताते हैं.
पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार….अर्थात हनुमान जी महाराज ने लंका के राक्षसों को देखा और उस दौरान हनुमान जी ने अपने मन में विचार किया.
अति लघु रूप धरौं निसि नगर करौं पइसार… उन्होंने सोचा कि अगर हम अपना आकार छोटा कर ले तो रात के समय लंका में प्रवेश कर सकते हैं .
शशिकांत दास बताते हैं कि सुंदरकांड के इस दोहे में हनुमान जी महाराज की बुद्धिमत्ता और उनकी योजना का वर्णन किया गया है. जिसमें वह लंका में प्रवेश करने के लिए अपने आकार को छोटा करने का विचार कर रहे हैं. हनुमान जी महाराज के इस दोहे का जप करने से हनुमान जी की शक्ति के साथ प्रभु राम का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं.