Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कुछ समय से अपनी आक्रामक नीतियों को लेकर चर्चा में रहे हैं। टैरिफ, जंग और परमाणु मुद्दों पर सख्त रुख अपनाने की वजह से कई देशों ने खुलकर विरोध किया। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि ट्रंप अपने तेवर बदल रहे हैं और टकराव की जगह ट्रेड डील पर जोर दे रहे हैं। आखिर क्या है इस बदलाव की वजह? आइए समझते हैं।
टैरिफ नीति से बढ़ी नाराजगी
पिछले साल ट्रंप ने भारत, जापान और चीन समेत कई देशों पर भारी टैरिफ लगा दिए थे। भारत पर तो 50 प्रतिशत तक डबल टैरिफ लगाया गया। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के खिलाफ नाराजगी बढ़ी। रूस-यूक्रेन, ईरान-इजराइल और भारत-पाकिस्तान जैसे मुद्दों पर दखल देने की कोशिश ने भी कई देशों को असहज कर दिया। नतीजा यह हुआ कि कई देश अमेरिका से दूरी बनाने लगे।
रूस-चीन-भारत की नजदीकी और SCO
टैरिफ के दबाव के बीच भारत, रूस और चीन के रिश्तों में नई गर्माहट दिखी। चीन में आयोजित Shanghai Cooperation Organisation (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी ने नई तस्वीर पेश की। इन मुलाकातों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिस पर ट्रंप ने ठंडी प्रतिक्रिया दी। यह संकेत था कि वैश्विक समीकरण बदल रहे हैं।
वेनेजुएला और ईरान मुद्दे से छवि को झटका
ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति पर कार्रवाई और ईरान को खुली धमकियों से अपनी छवि और कठोर बना ली। तेल और प्रतिबंधों की राजनीति ने अमेरिका को आलोचना के घेरे में ला दिया। कई देशों ने इसे दबाव की राजनीति बताया। इससे ट्रंप की अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर पड़ा और कूटनीतिक मोर्चे पर अलगाव बढ़ा।
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अब ट्रेड डील पर फोकस, चीन से बढ़ती नजदीकी
हाल के महीनों में ट्रंप ने भारत के साथ टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया और कई वस्तुओं पर जीरो टैरिफ की सहमति बनी। बांग्लादेश के साथ भी समझौता हुआ। अब नजर चीन पर है। ट्रंप ने कहा है कि वह अप्रैल में चीन जाएंगे और साल के अंत में चीन के राष्ट्रपति **Xi Jinping अमेरिका आएंगे। दोनों नेताओं की फोन पर 90 मिनट की बातचीत में ट्रेड पर खास चर्चा हुई।
कुल मिलाकर, संकेत साफ हैं कि ट्रंप अब जंग की सख्त भाषा से हटकर व्यापार और आर्थिक समझौतों के जरिए रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। बदलती वैश्विक राजनीति में यह रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है।




