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ढोडरामोहार स्टेशन पर जी.टी., दक्षिण, अंडमान और पंचवली एक्सप्रेस के ठहराव की मांग तेज

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खबरवाणी

ढोडरामोहार स्टेशन पर जी.टी., दक्षिण, अंडमान और पंचवली एक्सप्रेस के ठहराव की मांग तेज

सिर्फ एक मेमो ट्रेन का स्टॉपेज, सैकड़ों गांवों के यात्रियों को उठानी पड़ रही परेशानी , सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के नजदीक होने से पर्यटन और आवागमन दोनों को मिलेगा बढ़ावा

भौंरा । नागपुर–इटारसी रेलखंड के ढोडरामोहार रेलवे स्टेशन पर अब जी.टी. एक्सप्रेस, दक्षिण एक्सप्रेस, अंडमान एक्सप्रेस और पंचबली एक्सप्रेस के ठहराव की मांग तेजी से उठ रही है। नगरवासियों और आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे ने स्टेशन का आधुनिकीकरण और ट्रैक की गति क्षमता तो बढ़ा दी है, मगर आज भी इस स्टेशन पर सिर्फ एक मेमू ट्रेन आमला–इटारसी का ही ठहराव है। इसके अलावा किसी भी लंबी दूरी की बड़ी ट्रेन का स्टॉपेज नहीं है, जिससे सैकड़ों गांवों के लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

कोरोना काल से पहले रुकती थी पंचबली एक्सप्रेस

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि कोरोना महामारी से पहले पंचबली एक्सप्रेस का ठहराव ढोडरामोहार में होता था, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलती थी। लेकिन महामारी के बाद रेलवे ने यह स्टॉपेज हटा दिया और अब तक बहाल नहीं किया गया है। यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए 50 किलोमीटर दूर बैतूल या इटारसी स्टेशन जाना पड़ता है।

पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है ढोडरामोहार

ढोडरामोहार स्टेशन के नजदीक ही प्रसिद्ध सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का चुरना जंगल क्षेत्र स्थित है, जहां देश-विदेश से पर्यटक जंगल सफारी के लिए आते हैं। इस स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव होने से पर्यटन को सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और सशक्त होगी।
ढोडरामोहार स्टेशन भौंरा नगर में स्थित है। भौंरा, बीजादेही, और बंगाली कैंप चोपना के सैकड़ों गांवों के लोग भौंरा से अपना आवागमन करते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यहां ट्रेनें रुकने से क्षेत्र के विद्यार्थियों, श्रमिकों और व्यापारियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

बीजादेही क्षेत्र के आदिवासी गांवों को भी मिलेगा लाभ

ढोडरामोहार के समीपवर्ती आदिवासी बहुल बीजादेही क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के लोग रोजगार और शिक्षा के उद्देश्य से रोजाना बाहर आते-जाते हैं। लेकिन ट्रेन का ठहराव न होने से उन्हें भी बैतूल या इटारसी तक बसों या निजी वाहनों से यात्रा करनी पड़ती है। यदि ढोडरामोहार पर एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज दिया जाता है, तो इन ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा और उनके समय व धन दोनों की बचत होगी।

स्टेशन पूरी तरह सक्षम, अब ठहराव में कोई तकनीकी बाधा नहीं

रेलवे ने हाल में ढोडरामोहार स्टेशन का तकनीकी उन्नयन कर इसे पूरी तरह आधुनिक बनाया है।
डाउन मैन लाइन की गति 65 से बढ़ाकर 85 किमी प्रति घंटा कर दी गई है।
लूप लाइन की गति सीमा 15 से बढ़ाकर 30 किमी प्रति घंटा की गई है।
10 नए टर्नआउट, नई अप व डाउन लूप लाइनें, और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाए गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार अब स्टेशन पूरी तरह सुरक्षित और उच्च गति वाली ट्रेनों के ठहराव के लिए उपयुक्त है।

आउटर पर खड़ी रहती हैं ट्रेनें, यात्रियों को नहीं मिलता लाभ

ढोडरामोहार निवासी सतीश पवार, गौरव राठौर, अजय मिश्रा, प्रदीप दुबे, अश्वनी दुबे राजेंद्र कावड़कर ने कहा कि ट्रेनों की स्पीड तो बढ़ी है, लेकिन रेलवे ने समय सारिणी में बदलाव नहीं किया। इटारसी और बैतूल, नागपुर आउटर पर कई बार ट्रेनें 20 से 30 मिनट तक खड़ी रहती हैं। ऐसे में आउटर पर रोकने से बेहतर है कि इन्हें ढोडरामोहार स्टेशन पर दो मिनट का ठहराव दिया जाए, जिससे यात्रियों को सुविधा और रेलवे को लाभ दोनों मिल सकें।

जब गति बढ़ी, तो ठहराव क्यों नहीं?

ग्राम पंचायत सरपंच मीरा धुर्वे ने कहा कि रेलवे ने ढोडरामोहार स्टेशन की गति और क्षमता दोनों बढ़ाई हैं, लेकिन यात्रियों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा। आउटर पर खड़ी रहने की बजाय ट्रेनों को ऐसे स्टेशनों पर रोका जाए तो इससे रेलवे की आय भी बढ़ेगी और यात्रियों को राहत भी मिलेगी।
जनपद सदस्य सुधीर नायक ने भी कहा कि,पहले यह स्टेशन ढलान वाले क्षेत्र में था, लेकिन अब ट्रैक पूरी तरह समतल कर दिया गया है। स्टेशन तकनीकी रूप से सक्षम है, इसलिए एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव यहां बिल्कुल संभव और जनहित में है।

ज्ञापन सौंपने की तैयारी

भौंरा, चोपना, और बीजादेही क्षेत्र के ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की है। भाजपा मंडल अध्यक्ष महेंद्र सिरोठिया ने कहा यह स्टेशन सौ से अधिक गांवों की जीवनरेखा है। रेलवे ने जब गति बढ़ाई है, तो अब जरूरत है ठहराव की। विभाग को इस मांग को गंभीरता से लेकर जल्द कदम उठाना चाहिए।

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