असली आदिवासी का हक मार रहे धर्मांतरित आदिवासी, पत्रकारवार्ता में बोले संविधान में होना चाहिए संशोधन
बैतूल – जिले सहित प्रदेश में आदिवासियों का धर्मांतरण कर उन्हें दूसरी जाति में शामिल किया जा रहा है। इससे धर्मांतरित आदिवासी असली आदिवासियों का नौकरी, शिक्षा, रोजगार सहित अन्य हक मार रहे हैं। इसी को लेकर आज होटल जायजा में जनजातीय सुरक्षा मंच की पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. महेंद्र सिंह चौहान ने कही। उन्होंने कहा कि हमारे संगठन की मांग है कि धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर किया जाए। त्रकारवार्ता में जनजातीय सुरक्षा मंच के छोटू सिंह उइके, राजू तुमड़ाम, वीरेंद्र धुर्वे, आशाराम पटेल एवं सीताराम चढ़ोकार मौजूद थे।
धर्मांतरित को ना माना जाए आदिवासी
श्री चौहान ने कहा कि जनजातीय सुरक्षा मंच मांग करता है कि शासन की योजनाओं का लाभ लेते हुए असली आदिवासियों का हक मारने वाले आदिवासियों के लिए संविधान में संशोधन हो और जो आदिवासी धर्मांतरित होकर दूसरे धर्म को मानने लगे हैं ऐसे लोगों को आदिवासी ना मान जाए। ऐसा होने से शासन की योजनाओं का लाभ वास्तविक आदिवासी ही मिल सकेंगा वहीं आदिवासी रीति, नीति, धर्म, संस्कृति की रक्षा भी हो सकेगी।
धर्मांतरित व्यक्ति को ना दें राजनैतिक दल टिकट
श्री चौहान ने कहा कि एक तो कुछ आदिवासी धर्मांतरित होकर दूसरे धर्म का लाभ ले रहे हैं वहीं आदिवासी आरक्षण का भी भरपूर लाभ ले रहे हैं। इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मांग को जनजाति सुरक्षा पूरे देश में उठाएगा और आंदोलन भी करेगा। मंच ने मांग की है कि राजनैतिक दल अनुसूचित जनजातियों के लिये आरक्षित सीट पर धर्मान्तरित व्यक्ति को टिकट नहीं दें। अनुसूचित जनजाति सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक व सांसद इस मांग के समर्थन में आवाज उठाएँ, जनप्रतिनिधि धर्मान्तरित व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में से हटाने में मदद करें।
संगठन की यह है मांग
ऐसे लोग जो समाज के लिये कुछ करना चाहते है वे जनजातीय वर्ग के साथ हो रहे इस अन्याय की लड़ाई में हमारे साथ खड़े हों और ग्राम पंचायत से लेकर सामाजिक पदों पर बैठे धर्मान्तरित व्यक्तियों को बेनकाब करें। जनजाति वर्ग के लिये आरक्षित सरकारी नौकरियों को हथियाने वाले ऐसे गलत एवं षडय़ंत्रकारी धर्मान्तरित व्यक्तियों के खिलाफ न्यायालयीन कार्यवाही हेतु आगे आए। केन्द्र एवं राज्य सरकारों में ऊँचे पदों पर बैठे अफसरों से भी यह अपेक्षा है कि वे समाज के अंतिम छोर पर खड़े इस जनजातीय समुदाय की आवाज बनें और धर्मान्तरित व्यक्तियों को अनुचित लाभ देने से खुद को रोकें।
भारत के प्रत्येक संसद एवं विधानसभा सदस्य से अपेक्षा की जाती है कि वे जनजातियों को उनका वाजिब हक दिलाने में अपनी ओर से व्यक्तिगत रुचि लेकर पहल करें और धर्मान्तरित व्यक्तियों को बेनकाब करें। धर्मान्तरित जनजातीय व्यक्तियों को, अनुसूचित जनजाति सूची से हटाया जाए। अगर जनजातीय धर्म, संस्कृति, सभ्यता और मान्यता को जीवित रखना है तो उनके स्वधर्म को जीवित रखना होगा। सरकारी नौकरियाँ पहले से ही कम है, यदि समय रहते धर्मांतरित लोगों को पदच्युत नहीं किया गया तो जनजाति समूदाय को नौकरियों का अवसर कभी नहीं मिल पाएगा। इसलिये हमें जनजातीय वर्ग के हित में इस लड़ाई में संयुक्त रूप से साथ आना होगा। सहित अन्य मांगें शामिल हैं।






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