खबरवाणी
6 दिसंबर -डॉक्टर अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस पर विशेष
संघर्ष का दुसरा नाम – डॉ अंबेडकर राहुलअम्बेडकर
आज यानि 6दिसंबर को बोधिसत्व
डॉ अम्बेडकर का 70वा महापरिनिर्वाण दिवस है आज का दिन गमगीन होने का नही है ना ही उदास होने का है बल्कि परिवर्तन कारी विरासत के लिए श्रद्धांजलि के रूप में बहुत मायने रखता है । .
देखिए दो पंक्तियां
देशप्रेम में जिसने आराम को ठुकराया था ।
गिरे हुए इंसानो को स्वाभिमान सिखाया था !!
बौद्धसाहित्य के अनुसार महापरिनिर्वाण तथागत बुद्ध की मृत्यु को माना जाता है। जिसका संस्कृत में अर्थ है। मृत्यु के बाद निर्वाण । परिनिर्वाण को जीवन संघर्ष और मृत्यु तथा जन्म के चक्र से मुक्ति माना जाता है। र्डॉ . अम्बेडकर के अनुसार उनकी विचार धारा और विचारो के मामले में सबसे करीब थे। इन्हे बौद्ध गुरु भी माना जाता है। क्योंकि नागपुर के दीक्षा भूमि पर 14अक्टूबर 1956 को लाखो की संख्या उनके अनुयायियो ने इनके साथ बौद्ध धर्म ग्रहण किया था। साथ ही उन्होंने भारत में अस्पृश्यता जैसे सामाजिक अभिशाप का उन्मूलन करने में बहुत बड़ा प्रभाव डाला था। । यह दिन शोक मनाने का दिन नही है। यह दिन चिंतन और प्रेरणा का दिन है। आगे बढने का आह्मान करता है।
” दुनिया मे डाँ अम्बेडकर जैसे कोई महान न हुआ।
ईमानदार तो हुए लेकिन इंसान न हुआ ।
अखबार
को भी संघर्ष का साथी बनाया।
महान समाज सुधारक के रूप में उन्होंने दलितो वंचितो की आवाज बुलंद करने के लिए ” मूकनायक ( बायस्लेस लोगो का नेता) अखबार शुरू किया। इसके साथ अनेको पुस्तके भी लिखी इस लेख में उनका उल्लेख संभव नही है। डाँ अम्बेडकर ने शिक्षा का प्रसार करने आर्थिक स्थितियो में सुधार लाने और सामाजिक असमानताओ को दूर करने के लिए 1923 मे बहिष्कृत हितकारिणी सभा [ आऊट कास्ट वेलफेयर एसोसियन ] की स्थापना की सभी लोगो को पीने का पानी मिले इसके लिए उन्होंने महाड़ मार्च (1927) और कालाराम मंदिर (1930) में ” मंदिर प्रवेश आंदोलन जैसे ऐतिहासिक आंदोलनो का नेतृत्व किया 1932 में पूना समझौते के द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया । इस समझौते ने दलितो के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्रो की जगह आरक्षित सीटे की लड़ाई मे एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।





