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वाइल्ड लाइफ कारिडोर बनने से रुका पूरे बैतूल-औबेदुल्लागंज फोरलेन का काम

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वाइल्ड लाइफ कारिडोर बनने से रुका पूरे बैतूल-औबेदुल्लागंज फोरलेन का काम

सांध्य दैनिक खबरवाणी, बैतूल
जब बैतूल-नागपुर फोरलेन का टेंडर ओरिएंटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला और जिस गति और गुणवत्ता के साथ इस फोरलेन का काम पूरा हुआ तो जिले के लोगों में एक आस जगी कि ऐसी ही सडक़ बैतूल से भोपाल के बीच बनेगी और आवागमन बैतूल-नागपुर की तरह ही सुलभ और आरामदायक होगा।
बैतूल-औबेदुल्लागंज का टेंडर पहली बार जब ट्रांस्टाय इंडिया लिमिटेड को मिला और जिस गति से उन्होंने काम शुरू किया तो लगा कि बहुत जल्द बैतूल भोपाल आवागमन सुलभ हो जाएगा पर अचानक ट्रांस्टाय जैसी बड़ी कंपनी बीच में काम बंद कर सरकार की मोटी रकम कागजों पर काम दिखाकर बटोरकर भाग गई और नीमपानी स्थित साइड ऑफिस पर करोड़ों रुपए के फायनेंस किए हुए उपकरण और डंपर आदि छोडक़र रफूचक्कर होने के बाद सरकार को पुन: टेंडर प्रक्रिया करने में वर्षों लग गए और उसके बाद जब दोबारा काम शुरू हुआ तो वर्तमान ठेकेदार द्वारा मंथर गति से काम शुरू हुआ और बीच-बीच में लंबे समय के लिए काम बंद होता हरा। सूत्र बताते हैं कि उक्त कंपनी की वित्तीय स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वह इतना बड़ा निर्माण कार्य संपन्न कर पाती जिसके चलते निर्माण की गति धीमी रही और बीच-बीच में शासकीय अनुमतियों में विलंब से निर्माण कार्य रुका रहा।
वर्तमान में बैतूल से नीमपानी तक की सडक़ का निर्माण हो चुका है। बरेठा घाट से पूर्व और घाट के पश्चात सिर्फ पेड़ों की कटाई के अलावा बाकी कोई काम नहीं हुआ। नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया के सूत्रों के अनुसार जब से बरेठा क्षेत्र को वाइल्ड लाइफ कारिडोर में शामिल किया गया है तब से नए नियमों के तहत अनुमति और डिजाइन की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि अनुमति मिलना बहुत आसान नहीं है और अनुमति मिलने के पश्चात इस क्षेत्र की अलग से टेंडर प्रक्रिया होगी तत्पश्चात काम शुरू होगा और इस क्षेत्र में काम करना बहुत दूभर है इसलिए सामन्य से अधिक समय लगने का अनुमान लगाया जा रहा है। संभावित रूप से यदि शीघ्र अनुमति मिल भी जाती है तो कम से कम दो वर्ष सिर्फ बरेठा क्षेत्र में निर्माण पूर्ण करने में लगेंगे। अर्थात ‘दिल्ली अभी दूर है वाली कहावत बैतूल वासियों के लिए भोपाल अभी दूर’ में परिवर्तित होती नजर आ रही है। एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार जिस हिस्से का निर्माण कार्य पूरा हो गया है उस हिस्से में जहां पर मेंटेनेंस की आवश्यकता है वहां काम चल रहा है और जहां मेंटेनेंस की आवश्यकता के बावजूद काम नहीं हो पा रहा वह संपूर्ण क्षेत्र वाइल्ड लाइफ कारिडोर में आता है जिसके चलते वहां काम नहीं किया जा रहा है।
हालांकि बैतूल से केसला तक जो निर्माण संपन्न हो चुका है उसकी गुणवत्ता इतनी खराब है कि वाहन चालकों को यह महसूस ही नहीं होता कि यह सडक़ नई बनी है।
पिछले लंबे समय से कुंडी टोल प्लाजा को लेकर क्षेत्रवासियों में भारी रोष है और उनका मानना है चूंकि टोल के पहले और टोल के बाद बड़े हिस्से में सडक़ का निर्माण नहीं हुआ फिर एनएचएआई द्वारा टोल क्यों लिया जा रहा है, इस पर एनएचएआई का कहना है कि वन विभाग की अनुमति और उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण के निराकरण के बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा। साथ ही अभी जो टोल की राशि वसूली जा रही है निर्माण कार्य पूरा होने के कारण उसमें और बढ़ोतरी की जाएगी। वाहन चालकों को जेब पर पडऩे वाले भार के लिए अभी मानसिक तौर पर तैयार रहना चाहिए।
इनका कहना है
मनीष मीना प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई बरेठा घाट और उसके पास-पास का जितना भी क्षेत्र है उसका निर्माण कार्य इसलिए शुरू नहीं हो पाया कि इसके संदर्भ में उच्च न्यायालय का स्थगन आदेश है। इसके बाद कुछ समय पूर्व इस क्षेत्र को वाइल्ड लाइफ कारिडोर में शामिल कर लिया गया है। जिसके कारण सडक़ निर्माण की पूरी प्रक्रिया और डिजाइन में परिवर्तन हो रहा है, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। इसके पश्चात अनुमति के लिए आवेदन किया जाएगा। तत्पश्चात निर्माण कार्य शुरू होगा।


 

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