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मनरेगा को यथावत रखने मुलताई एवं प्रभात पट्टन में कांग्रेसियों ने सौपा ज्ञापन

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खबरवाणी

मनरेगा को यथावत रखने मुलताई एवं प्रभात पट्टन में कांग्रेसियों ने सौपा ज्ञापन

मुलताई।केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना का नाम बदलकर कानून में बदलाव करते हुए मनरेगा को खत्म करने कि साजिश बताए हुए मुलताई एवं प्रभात पट्टन में कांग्रेसियों ने राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौपा है। प्रभातपटन में पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे के नेतृत्व में तो मुलताई में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अरुण यादव सहित वरिष्ठ कांग्रेसियों के नेतृत्व में सौपे गए ज्ञापन में बताया भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में डा. मनमोहन सिंह द्वारा देश के प्रत्येक व्यक्ति को कार्य देने के उद्देश्य सेतत्कालीन सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम लागू किया गया था। यह विश्व की सबसे बड़ी रोजगार देने वाली योजना बनी थी। वर्तमान में केन्द्र की मोदी सरकार इस योजना को खत्म करना चाहती है,जिसका कांग्रेस पार्टी पुरजोर विरोध करती है।ज्ञापन में बताया यह काम का अधिकार न होकर मोदी सरकार की कृपा दृष्टि पड़ने वाली रेवड़ी होगी अर्थात पहले किसी भी परिवार द्वारा कार्य मांगने पर पंचायत को 45 दिवस में कार्य उपलब्ध कराना होता था अब मोदी की पसंद की पंचायतों को ही यह कार्य मिलेगा अर्थात आपके काम का अधिकार छीना जा रहा है। अब हर समय कार्य उपलब्ध नही होगा कांग्रेस सरकार के समय 365 दिन न्युनतम दर पर कार्य उपलब्ध रहता था अब फसल कटाई के समय रोजगार उपलब्ध नही रहेगा तथा हर साल मजदूरी बढ़ने की गारंटी नही।ग्राम पंचायत की शक्तियां ठेकेदार को सौंपी जा रही है। पूर्व में प्रचलित योजना में ग्राम पंचायत ही पंचायतों में अपनी जरूरत के हिसाब से कार्य करती थी अब यह कार्य ठेकेदार के माध्यम से होगा जिससे निश्चित रूप से शोषण ही होगा।मनरेगा योजना की पूरी राशि पहले केन्द्र सरकार देती थी अब इस योजना की 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार को देनी होगी। परिणाम यह होगा कि कई राज्य सरकारों की हालत इतनी अच्छी नही है कि वह इस योजना का 40 प्रतिशत का खर्चा उठा पायें। अर्थात कई राज्यों में यह योजना लागू ही नही हो पाएगी। मनरेगा योजना की पूरी राशि पहले केन्द्र सरकार देती थी अब इस योजना की 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार को देनी होगी। परिणाम यह होगा कि कई राज्य सरकारों की हालत इतनी अच्छी नही है कि वह इस योजना का 40 प्रतिशत का खर्चा उठा पायें। अर्थात कई राज्यों में यह योजना लागू ही नही हो पाएगी।

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