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वन की पाठशाला में बच्चों का प्रकृति से सजीव संवाद
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के तवा बफर में ‘अनुभूति’ कार्यक्रम, विद्यार्थियों ने सीखा जंगल और संरक्षण का पाठ
भौंरा। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अंतर्गत वन परिक्षेत्र तवा बफर में सोमवार को पर्यावरणीय जागरूकता से जुड़ा अनुभूति कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल चौपना के विद्यार्थियों ने भाग लिया। उद्देश्य विद्यार्थियों को जंगल, जैव विविधता और वन्यप्राणी संरक्षण से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना रहा।
प्रातः 7 बजे विद्यार्थियों को विद्यालय से वाहनों द्वारा कपिलधारा कैंप लाया गया। रास्ते में बच्चों ने तालाब के समीप तेंदुए के पगचिह्न देखे तथा विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों का अवलोकन किया, जिससे उनमें वन्यजीवों के प्रति जिज्ञासा बढ़ी। कैंप पहुंचने पर नाश्ता कराया गया, इसके बाद कैप, पेन और पुस्तकों सहित शैक्षणिक सामग्री का वितरण किया गया। अनुभूति मास्टर ट्रेनर राजेश पटेल तथा अनुभूति प्रेरक लालसिंह चावले, अमित कौरव और प्रशान्त सिंह के नेतृत्व में विद्यार्थियों को चयनित ट्रेल पर समूहों में पैदल भ्रमण कराया गया। भ्रमण के दौरान मार्ग में मिलने वाले पौधों, औषधीय वृक्षों और वनस्पतियों की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर वन परिक्षेत्र अधिकारी तवा बफर अमित सिंह चौहान ने विद्यार्थियों को वनों की पारिस्थितिकी, जैव विविधता और संरक्षण के महत्व पर सरल व प्रभावी ढंग से समझाया। उन्होंने रोचक क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों की सहभागिता बढ़ाई और वन व वन्यप्राणी संरक्षण से जुड़े व्यवहारिक संदेश दिए। साथ ही चित्रकला एवं अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कैंप में विद्यार्थियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। इसके बाद सांप-सीढ़ी, खाद्य श्रृंखला जैसी गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन को समझाया गया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में कार्यरत डॉग ‘अपोलो’ का डेमो रहा, जिसे बच्चों ने कौतूहल के साथ देखा।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि राजेश ऊइके, रामकिशोर राय, राजकुमार कौरव, निशांत सिंह सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी, सुरक्षा श्रमिक, स्वास्थ्य विभाग घोड़ाडोंगरी की टीम तथा विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर समूह फोटो लिया गया और विद्यार्थियों को सुरक्षित रूप से वाहनों द्वारा विद्यालय वापस भेजा गया। यह अनुभूति कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए एक प्रभावी शैक्षणिक अनुभव साबित हुआ, जिसने उन्हें प्रकृति के सौंदर्य के साथ-साथ वन और वन्यप्राणी संरक्षण की जिम्मेदारी का भी बोध कराया।





