Children’s Health: अक्सर माता पिता यह सोचकर निश्चिंत हो जाते हैं कि बच्चे की सांस से बदबू इसलिए आ रही है क्योंकि उसने ठीक से ब्रश नहीं किया। लेकिन अगर बच्चे के मुंह से लगातार दुर्गंध आती रहे, तो इसे हल्के में लेना बड़ी गलती हो सकती है। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बदबूदार सांस किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत भी हो सकती है। ऐसे में समय रहते कारण जानना बेहद जरूरी है।
टॉन्सिल स्टोन से आ सकती है सड़ी अंडे जैसी बदबू
डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों में टॉन्सिल स्टोन यानी टॉन्सिल में फंसा खाना बदबू का बड़ा कारण बन सकता है। जब बच्चा खाना खाने के बाद पानी नहीं पीता, तो खाने के छोटे कण टॉन्सिल में फंस जाते हैं। वहां बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे मुंह से सड़े अंडे जैसी तेज बदबू आने लगती है। यह समस्या बार बार होने पर इन्फेक्शन का रूप ले सकती है।
साइनस इंफेक्शन भी बन सकता है वजह
अगर बच्चा बार बार मुंह खोलकर सांस लेता है या उसकी नाक से पीला या हरा स्राव निकलता है, तो यह साइनस की समस्या हो सकती है। साइनस इंफेक्शन में जमा म्यूकस से भी सांस में बदबू आने लगती है। ऐसे बच्चों को अक्सर सिर दर्द, नाक बंद रहने और थकान की शिकायत भी रहती है।
नेल पॉलिश जैसी गंध हो तो हो सकता है डायबिटीज
अगर बच्चे की सांस से अजीब सी मीठी या नेल पॉलिश रिमूवर जैसी गंध आती है, तो यह डायबिटीज का संकेत हो सकता है। यह स्थिति तब होती है जब शरीर में शुगर का स्तर असामान्य हो जाता है। ऐसे में बिना देर किए बच्चे की जांच कराना बेहद जरूरी होता है।
मसूड़ों की बीमारी और कैविटी भी जिम्मेदार
बच्चों को मीठा बहुत पसंद होता है और ज्यादा मिठाई खाने से दांतों में कीड़े लगना या मसूड़ों में इंफेक्शन आम बात है। अगर मसूड़ों से खून आता है, सूजन रहती है या दांतों में कैविटी है, तो इससे भी मुंह से बदबू आ सकती है। नियमित दंत जांच और सही सफाई जरूरी है।
नाक में फंसी कोई चीज भी दे सकती है बदबू
कई बार छोटे बच्चे खेल खेल में नाक में कोई छोटी चीज डाल लेते हैं। अगर बच्चे की एक ही नाक बहती रहे या वह एक ही नथुने से सांस ले, तो समझ जाना चाहिए कि नाक में कुछ फंसा हो सकता है। इससे भी तेज बदबू आने लगती है।
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माता पिता क्या करें
अगर बच्चे की सांस से बदबू लगातार बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज न करें। केवल ब्रश पर ध्यान देने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। समय पर जांच से बड़ी बीमारी को रोका जा सकता है और बच्चे की सेहत सुरक्षित रहती है।





