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चैत्र नवरात्रि राम जन्मोत्सव की धूम: कन्या पूजन और भंडारों के साथ थमा नौ दिनों का उल्लास
आमला। नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में गूंजे प्रभु श्रीराम के जयकारे, ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ जवारा विसर्जन
आमला। नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में शक्ति की उपासना और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव का पावन पर्व चैत्र नवरात्रि आज श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। नौ दिनों तक चले भक्ति के इस महापर्व का समापन आज रामनवमी के अवसर पर कन्या भोज, विशाल भंडारों और भव्य शोभायात्राओं के साथ हुआ। नगरीय क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में भी सुबह से ही मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा।
नौ स्वरूपों की भक्ति का पूर्ण हुआ अनुष्ठान
नवरात्रि के प्रथम दिवस माँ शैलपुत्री से शुरू हुई आराधना द्वितीय दिवस माँ ब्रह्मचारिणी, तृतीय माँ चंद्रघंटा, चतुर्थ माँ कुष्मांडा, पंचम माँ स्कंदमाता, षष्ठम माँ कात्यायनी, सप्तमी माँ कालरात्रि, अष्टमी को माँ महागौरी और आज नवमी तिथि पर माँ सिद्धिदात्री के विशेष पूजन के साथ संपन्न हुई। भक्तों ने नौ दिनों तक कठिन व्रत और संयम के साथ माता के इन नौ स्वरूपों की उपासना की।
घर-घर हुआ कन्या भोज, मांगी क्षमा
आज सुबह से ही घरों में उल्लास का माहौल रहा। नवमी तिथि पर श्रद्धालुओं ने नौ कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान भक्तों ने नौ दिनों की पूजा-अर्चना में हुई अनजानी भूल-चूक के लिए माता रानी से क्षमा याचना की और सुख-समृद्धि की कामना की। कन्या पूजन के पश्चात ही भक्तों ने अपना व्रत खोला।
श्रीराम जन्मोत्सव पर निकली भव्य शोभायात्रा
रामनवमी के अवसर पर आमला नगरी सहित ग्रामीण क्षेत्रों नांदपुर, रमली, ससुद्रा, बोरदही और जम्बाडा में उत्सव का अद्भुत नजारा दिखा। राम मंदिरों में सुबह विशेष महाआरती की गई, जिसके बाद भगवान राम की भव्य झांकियों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। “जय श्री राम” के नारों से पूरा आकाश गुंजायमान हो उठा। जगह-जगह भक्तों के लिए विशाल भंडारे आयोजित किए गए, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।
चंद्रभागा नदी पर हुआ जवारा विसर्जन
आस्था के इस पर्व के अंतिम दिन जवारा (जग) विसर्जन का विशेष महत्व रहा। भक्तों ने अपने घरों और मंदिरों में स्थापित किए गए जवारों की ढोल-नगाड़ों के साथ विसर्जन यात्रा निकाली। आमला नगरीय क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने चंद्रभागा नदी पर पहुंचकर विधि-विधान से पूजन किया और विसर्जन के साथ ही नौ दिवसीय अनुष्ठान का समापन किया।





