Budget Planning: हर साल जब केंद्रीय बजट पेश होने का समय आता है, तो देशभर में चर्चाएं तेज हो जाती हैं। टैक्स बढ़ेगा या घटेगा, महंगाई पर क्या असर पड़ेगा, आम आदमी को राहत मिलेगी या नहीं। लेकिन इन तमाम अटकलों के बीच बजट की असली तैयारी बेहद सख्त गोपनीयता में होती है। नॉर्थ ब्लॉक के अंदर महीनों तक चलने वाली यह प्रक्रिया आम लोगों की नजरों से पूरी तरह दूर रहती है।
बजट को गुप्त रखना क्यों जरूरी होता है
बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह सरकार की आर्थिक सोच, नीतियों और प्राथमिकताओं को दर्शाता है। अगर बजट से जुड़ी कोई भी जानकारी समय से पहले बाहर आ जाए, तो इसका सीधा असर शेयर बाजार, व्यापार और निवेश पर पड़ सकता है। यही वजह है कि बजट को संसद में पेश होने से पहले पूरी तरह सीक्रेट रखा जाता है।
आजादी के बाद पहला बजट और 1950 का बड़ा विवाद
बहुत कम लोग जानते हैं कि आजाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। लेकिन बजट की गोपनीयता का महत्व तब समझ आया, जब साल 1950 में बजट लीक हो गया। उस समय तत्कालीन वित्त मंत्री जॉन मथाई का बजट संसद में पेश होने से पहले बाहर आ गया था। इस लीक ने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया और बाजार में हलचल मचा दी। हालात इतने बिगड़ गए कि जॉन मथाई को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
1950 के बाद बदले गए सख्त नियम
इस घटना के बाद सरकार ने बजट प्रक्रिया को और ज्यादा सुरक्षित बनाने का फैसला लिया। बजट की छपाई राष्ट्रपति भवन से हटाकर पहले मिंटो रोड और फिर नॉर्थ ब्लॉक स्थित सरकारी प्रेस में की जाने लगी। इसके साथ ही बजट से जुड़े काम को सिर्फ चुनिंदा अधिकारियों तक सीमित कर दिया गया। यहीं से लॉक इन पीरियड की परंपरा शुरू हुई।
क्या होता है लॉक इन पीरियड
लॉक इन पीरियड बजट की गोपनीयता की सबसे मजबूत कड़ी है। जैसे ही बजट का अंतिम ड्राफ्ट तैयार होने लगता है, वैसे ही वित्त मंत्रालय और प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े अधिकारी एक सीमित परिसर में बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान उनका बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग खत्म हो जाता है।
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न घर जाने की इजाजत न मोबाइल की सुविधा
लॉक इन पीरियड के दौरान अधिकारी घर नहीं जा सकते। मोबाइल फोन, इंटरनेट, निजी फोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। परिवार से बात करने के लिए भी बेहद सीमित और नियंत्रित व्यवस्था होती है। यह स्थिति तब तक बनी रहती है, जब तक वित्त मंत्री संसद में बजट भाषण नहीं दे देते।





