Budget 2026 को लेकर देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स की नजरें टिकी हुई हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को मोदी सरकार 3.0 का दूसरा पूर्ण बजट पेश करने जा रही हैं। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा। सूत्रों के मुताबिक इस बजट का फोकस ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के साथ-साथ मिडिल क्लास की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ाने पर रहेगा, ताकि बाजार में मांग बनी रहे। ऐसे में सैलरीड क्लास और निवेशकों के लिए कई बड़े ऐलान हो सकते हैं। आइए जानते हैं बजट 2026 में टैक्सपेयर्स को कौन-सी 5 बड़ी सौगात मिल सकती हैं।
स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने की उम्मीद
बजट 2026 में सैलरी पाने वालों को सबसे बड़ी राहत स्टैंडर्ड डिडक्शन के रूप में मिल सकती है। अभी नए टैक्स रिजीम में 75,000 रुपये और पुराने टैक्स रिजीम में 50,000 रुपये की छूट मिलती है। बढ़ती महंगाई को देखते हुए माना जा रहा है कि सरकार इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर सकती है। ऐसा होने पर कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में सीधा फायदा होगा और जेब थोड़ी और ढीली रहेगी।
टैक्स फ्री इनकम की सीमा हो सकती है और बड़ी
पिछले बजट में सरकार ने सेक्शन 87A के तहत 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री किया था। अब बजट 2026 में मिडिल क्लास को और राहत देने के लिए यह सीमा 13 लाख से 15 लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स पूरी तरह टैक्स के दायरे से बाहर आ सकते हैं।
80C और 80D में बदलाव की आस
पुराने टैक्स रिजीम को चुनने वालों के लिए सेक्शन 80C की सीमा सालों से 1.5 लाख रुपये पर अटकी हुई है। बजट 2026 में इसे बढ़ाकर 2 लाख या 2.5 लाख रुपये किया जा सकता है, जिससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, हेल्थ इंश्योरेंस पर मिलने वाली 80D की छूट भी 25,000 से बढ़कर 50,000 रुपये हो सकती है, जो महंगे इलाज के दौर में बड़ी राहत होगी।
LTCG टैक्स में मिल सकती है राहत
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स एक अहम मुद्दा है। फिलहाल 1.25 लाख रुपये तक के लाभ पर छूट मिलती है। निवेशकों की मांग है कि इसे बढ़ाकर 1.5 लाख या 2 लाख रुपये किया जाए, ताकि छोटे निवेशकों पर टैक्स का बोझ कम हो।
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NPS में मिल सकते हैं अतिरिक्त फायदे
रिटायरमेंट प्लानिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में भी बदलाव कर सकती है। संभावना है कि NPS टियर-2 अकाउंट पर टैक्स छूट दी जाए या फिर एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन की सीमा को सभी के लिए समान किया जाए। इससे नौकरीपेशा लोगों को भविष्य की चिंता से कुछ राहत मिलेगी।





