Brain Damage: हमारा दिमाग पूरे शरीर का कंट्रोल रूम है। लेकिन रोज़मर्रा की कुछ छोटी-छोटी गलतियाँ इस नाज़ुक अंग को चुपचाप नुकसान पहुँचाती रहती हैं। AIIMS और हार्वर्ड से प्रशिक्षित गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने अपने वीडियो में बताया कि हम में से कई लोग बिना जाने ही ऐसी आदतें अपनाए बैठते हैं जो दिमाग को गंभीर हानि पहुँचा सकती हैं।
कम प्रोटीन और फाइबर खाना – दिमाग को कमज़ोर करने वाली बड़ी गलती
डॉ. सेठी के मुताबिक, दिमाग को तेज़ और एक्टिव रखने के लिए प्रोटीन और फाइबर बेहद ज़रूरी हैं।कम प्रोटीन खाने से शरीर में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे “फील गुड” हार्मोन बनना कम हो जाता है, जिससे मूड, ध्यान और ऊर्जा प्रभावित होती है।वहीं फाइबर की कमी गट-ब्रेन एक्सिस को नुकसान पहुँचाती है, जिससे दिमाग और पाचन तंत्र का कनेक्शन कमजोर हो जाता है।इसलिए दाल, अंडा, पनीर, फल-सब्ज़ियाँ और साबुत अनाज ज़रूर खाएँ।
देर रात तक जागना – नींद का बिगड़ा रूटीन दिमाग का दुश्मन
अगर आप देर रात तक फोन स्क्रॉल करते रहते हैं और रोज़ लेट सोते हैं, तो ये दिमाग को धीरे-धीरे थका देता है।
नींद की कमी से
- फोकस कम होता है
- मूड बार-बार बदलता है
- एनर्जी लेवल गिर जाता है
हर दिन एक तय समय पर सोना और उठना दिमाग के लिए बेहद फायदेमंद होता है।
निगेटिव सेल्फ-टॉक – खुद को कोसना दिमाग को नुकसान पहुँचाता है
बार-बार खुद से कहना कि “मैं नहीं कर पाऊँगा”, “मैं बेकार हूँ”, आदि बातें सीधे दिमाग के स्ट्रेस सर्किट्स को एक्टिवेट करती हैं।
धीरे-धीरे आपका दिमाग इन्हीं बातों को सच मानने लगता है।
इसके बजाय पॉजिटिव सेल्फ-टॉक करने की आदत डालें। इससे दिमाग में नई सकारात्मक वायरिंग बनती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
रोज़ अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाना – दिमाग की सेहत का सबसे बड़ा खतरा
चिप्स, बिस्किट, पिज्ज़ा, मैगी, पैकेज्ड स्नैक्स, फ्रोज़न फूड जैसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का रोज़ाना सेवन दिमाग को सबसे तेज़ नुकसान पहुँचाता है।
इनसे
- चीनी की तलब बढ़ती है
- मूड स्विंग्स बढ़ते हैं
- दिमाग की कार्यक्षमता कम होती है
जितना हो सके घर का सादा और ताज़ा खाना खाएँ।
दिमाग को नुकसान होने पर क्या होता है?
अगर दिमाग को नुकसान पहुँचने लगे तो कई लक्षण दिख सकते हैं:
- जानकारी प्रोसेस करने में दिक्कत
- भावनाएँ समझने में परेशानी
- ध्यान और निर्णय क्षमता कम होना
- याददाश्त कमजोर होना
- चक्कर, सिरदर्द, नींद की समस्या
- गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ना
- शरीर में कमजोरी या सुन्नपन
- बोलने-चलने में दिक्कत
दिमाग की सेहत शरीर की नींव है। इसलिए रोज़मर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके इसे सुरक्षित रखा जा सकता है।



