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6.88 लाख की बाउंड्रीवॉल अधूरी, धीमी रफ्तार और गुणवत्ता पर उठे सवाल
शासकीय प्राथमिक शाला बाँकाभरदा में निर्माण कार्य लंबित, घटिया सामग्री के उपयोग के आरोप; विद्यार्थियों की सुरक्षा भी बनी चिंता
भौंरा। शाहपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत काँटावाड़ी के ग्राम बाँकाभरदा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में पांचवें राज्य वित्त आयोग की राशि से स्वीकृत बाउंड्रीवॉल निर्माण कार्य निर्धारित समय बीतने के बाद भी अधूरा पड़ा हुआ है। लगभग 6.88 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत यह निर्माण कार्य स्कूल परिसर की सुरक्षा को ध्यान में रखकर कराया जा रहा है, लेकिन कार्य की सुस्त रफ्तार और गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार शाला की बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए 24 जनवरी 2025 को स्वीकृति प्रदान की गई थी। निर्माण एजेंसी के रूप में ग्राम पंचायत काँटावाड़ी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि स्वीकृति के काफी समय बाद भी निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है और वर्तमान में बाउंड्रीवॉल कई स्थानों पर अधूरी स्थिति में दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य अत्यंत धीमी गति से किया जा रहा है। कई बार कार्य शुरू होने के बाद लंबे समय तक बंद रहने की स्थिति भी बनी रही, जिससे निर्माण की समयसीमा प्रभावित हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल परिसर की सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन कार्य अधूरा रहने से इसका उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
गुणवत्ता पर भी सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही सामग्री अपेक्षित गुणवत्ता की नहीं है। उनका कहना है कि निर्माण में तकनीकी मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण के नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा। यदि निर्माण कार्य में शुरू से ही गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में दीवार की मजबूती और स्थायित्व प्रभावित हो सकता है।
निर्माण कार्यों के जानकारों के अनुसार किसी भी बाउंड्रीवॉल निर्माण में मजबूत नींव, निर्धारित अनुपात में सीमेंट, रेत एवं गिट्टी का उपयोग, समतल एवं सीधी चिनाई, नियमित क्योरिंग (तराई) तथा तकनीकी अधिकारियों की निगरानी आवश्यक होती है। इन मानकों की अनदेखी से निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है।
निगरानी व्यवस्था पर उठे प्रश्न
ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग और जनपद पंचायत के तकनीकी अधिकारी नियमित निरीक्षण करते तो कार्य में हो रही देरी और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों को समय रहते दूर किया जा सकता था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव में निर्माण कार्य अपेक्षित गति और गुणवत्ता से नहीं हो पा रहा है।
स्कूल की सुरक्षा पर असर
ग्रामीणों का कहना है कि बाउंड्रीवॉल का मुख्य उद्देश्य विद्यालय परिसर को सुरक्षित बनाना और बाहरी हस्तक्षेप को रोकना है। लेकिन निर्माण अधूरा होने के कारण स्कूल परिसर आज भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सका है। इससे विद्यार्थियों और विद्यालय की संपत्ति की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए तथा कार्य को निर्धारित मानकों के अनुरूप शीघ्र पूर्ण कराया जाए। साथ ही निर्माण में हुई देरी के कारणों की भी जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।





