Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद सियासत का तापमान चढ़ गया है। महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव को पूरा भरोसा है कि इस बार सत्ता उनकी झोली में आएगी, वहीं एनडीए के नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार वापसी का दावा कर रहे हैं। लेकिन सवाल ये है कि तेजस्वी यादव सिर्फ M+Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण के भरोसे कब तक रहेंगे, जबकि नीतीश कुमार ने अपने 4 करोड़ लाभार्थियों (Beneficiaries) का ऐसा मजबूत वोट बैंक तैयार किया है, जो चुनाव का पासा पलट सकता है।
तेजस्वी का भरोसा M+Y समीकरण पर
तेजस्वी यादव की राजनीति लंबे समय से M+Y (मुस्लिम-यादव) वोट बैंक पर टिकी है।
राज्य में करीब 14% यादव और 17% मुस्लिम आबादी है।
इन दोनों समुदायों का वोट अब तक आरजेडी के साथ जाता रहा है।
हालांकि, 2020 के विधानसभा चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं ने नीतीश कुमार से किनारा कर लिया था।
जेडीयू ने 11 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे, परंतु एक भी नहीं जीता। इस बार पार्टी ने केवल चार मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं, जिससे संकेत साफ हैं कि यह वर्ग अब नीतीश से दूर है।
नीतीश का 4 करोड़ लाभार्थियों वाला वोट बैंक
बिहार के कुल 7.42 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 4 करोड़ वोटर नीतीश कुमार की योजनाओं के लाभार्थी हैं।
इनमें शामिल हैं —
- 1.67 करोड़ लोग जिन्हें बिजली बिल पर 125 यूनिट की छूट मिली,
- 1.13 करोड़ पेंशन लाभार्थी,
- 1.21 करोड़ महिलाएं जिनके खातों में ₹10,000 भेजे गए।
नीतीश कुमार ने इन योजनाओं से सीधे आम जनता तक पहुंच बनाई है।
यह वर्ग भले ही जाति या धर्म के आधार पर बंटा हो, लेकिन सरकारी मदद पाने वाले मतदाताओं में नीतीश की पकड़ अब भी मजबूत है।
महिलाएं और युवा तय करेंगे जीत की दिशा
तेजस्वी यादव को युवाओं का समर्थन मिलने की उम्मीद है, लेकिन यह समर्थन पूरे परिवार तक नहीं पहुंचता।
युवाओं के माता-पिता अब भी नीतीश कुमार को स्थिर शासन का प्रतीक मानते हैं।
वहीं, महिलाओं के वोट इस बार निर्णायक हो सकते हैं।
नीतीश ने महिलाओं के खाते में पैसे ट्रांसफर कर उन्हें सीधे लाभार्थी बनाया है।
तेजस्वी ने महिलाओं को ₹30,000 देने का वादा किया है, पर नीतीश की योजनाएं पहले से उनके जीवन को छू चुकी हैं।
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जाति और धर्म से परे ‘लाभार्थी वोट बैंक’ की नई राजनीति
बिहार में अब चुनाव सिर्फ जाति या धर्म पर नहीं, बल्कि ‘लाभार्थी बनाम वादा’ की राजनीति पर आधारित है।
नीतीश कुमार की योजनाओं से लाभ पाने वाले मतदाता अपने अनुभव से वोट देने की सोचते हैं।
यह वही मतदाता वर्ग है जो जल्दी राय नहीं बदलता।
2020 की तरह इस बार भी मुकाबला नीतीश बनाम तेजस्वी का ही है, पर समीकरण बदले हुए हैं।






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