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तेजस्वी की मीटिंग से कांग्रेस क्यों रही दूर? बिहार में अब सिर्फ दो ही रास्ते बचे, अंदर की कहानी बाहर!

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बिहार की राजनीति में इन दिनों एक ही सवाल चर्चा में है—कांग्रेस आखिर जा किस दिशा में रही है? ग्रैंड अलायंस की मीटिंग से कांग्रेस का दूरी बनाना कई बड़े राजनीतिक संकेत दे रहा है। तेजस्वी यादव भले ही सर्वसम्मति से नेता चुन लिए गए हों, लेकिन कांग्रेस का एक भी विधायक मीटिंग में न पहुँचना बहुत कुछ कह जाता है।

ग्रैंड अलायंस की मीटिंग से कांग्रेस की दूरी

29 नवंबर को पटना में ग्रैंड अलायंस की अहम बैठक हुई। RJD और वाम दलों के विधायक मौजूद थे, लेकिन कांग्रेस के एक भी MLA ने शिरकत नहीं की। सिर्फ एक MLC, समीर कुमार सिंह, वह भी औपचारिकता निभाने के लिए पहुंचे। कांग्रेस ने कहा कि उनके विधायक दिल्ली में मीटिंग में व्यस्त थे।राजनीतिक गलियारों में यह साफ माना जा रहा है कि कांग्रेस ने यह दूरी जानबूझकर बनाई है। अंदरखाने की खबरें बताती हैं कि कांग्रेस ने तेजस्वी यादव को नेता मानने से साफ इनकार कर दिया है।

खराब प्रदर्शन और बदलती रणनीति

2025 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ग्रैंड अलायंस का हिस्सा जरूर थी, लेकिन नतीजे बेहद खराब रहे।

  • 61 सीटों पर चुनाव,
  • जीत सिर्फ 6 सीटों पर,
  • वोट शेयर करीब 8.71%

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि RJD नेतृत्व के कारण उनका वोट बैंक टूट गया। तेजस्वी को नेता बनाने वाली बैठक से दूरी इसी नाराज़गी का नतीजा है। पार्टी अब इस बात पर गंभीरता से विचार कर रही है कि आने वाले चुनाव अकेले लड़ें या संगठन मजबूत कर नई राजनीतिक दिशा तलाशें।

बिहार में कांग्रेस का लगातार गिरता ग्राफ

पिछले दो दशकों में कांग्रेस का आधार लगभग खत्म हो गया है।

  • 2005: 9 सीट
  • 2010: 4 सीट (अकेले चुनाव)
  • 2015: 27 सीट (RJD–JDU के साथ)
  • 2020: 19 सीट
  • 2025: मात्र 6 सीट

2015 की सफलता भी गठबंधन की वजह से मिली थी, यह बात अब कांग्रेस खुद मान रही है। हर चुनाव में पार्टी का वोट शेयर ऊपर–नीचे होता रहा, लेकिन जनाधार लगातार घटता गया।

RJD से दूरी की असली वजह

2025 की हार के बाद कांग्रेस की अंदरूनी रिपोर्ट साफ कहती है कि—

  • कांग्रेस का वोट तो RJD की तरफ गया,
  • लेकिन RJD का वोट कांग्रेस को ट्रांसफर नहीं हुआ।
  • नतीजा—कांग्रेस का नुकसान ही नुकसान।

यहाँ तक कि बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार राम और नेता शकील अहमद खान दोनों अपनी सीटें हार गए। दिल्ली में हुई समीक्षा बैठक में बिहार नेताओं ने राहुल गांधी से साफ कहा—
“अगर RJD के साथ रहे, तो बिहार में कांग्रेस खत्म हो जाएगी।”

बिहार में कांग्रेस के सामने अब सिर्फ दो विकल्प

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक कांग्रेस के सामने अब दो ही रास्ते बचे हैं—

  1. अकेले चुनाव लड़कर संगठन मजबूत करे
  2. सीटों की बड़ी संख्या मांगकर ग्रैंड अलायंस में ‘बराबर की साझेदारी’ सुनिश्चित करे

तेजस्वी को नेता मानने से इंकार और मीटिंग से दूरी साफ संकेत है कि कांग्रेस अब अपनी नई राह बनाने की तैयारी में है।

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