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कौन हैं Bhupen Borah ? कांग्रेस छोड़ BJP में जाने की चर्चा, जानिए पूरा सियासी सफर

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असम की राजनीति में इन दिनों एक नाम खूब सुर्खियों में है – Bhupen Borah। खबर है कि वह कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह असम की सियासत में बड़ा उलटफेर माना जाएगा, खासकर 2026 विधानसभा चुनाव से पहले। सवाल यही है कि आखिर भूपेन बोरा कौन हैं और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है?

छात्र राजनीति से हुई शुरुआत

भूपेन बोरा का जन्म 30 अक्टूबर 1970 को असम के लखीमपुर में हुआ। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने राजनीति में कदम रख दिया था। नॉर्थ लखीमपुर कॉलेज और डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते समय वे छात्रसंघ में सक्रिय रहे। कॉलेज छात्रसंघ के उपाध्यक्ष और पोस्टग्रेजुएट छात्रसंघ के महासचिव जैसे पद संभाले।

देसी अंदाज में कहें तो छात्र जीवन से ही उनमें नेता बनने का कीड़ा था। सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने की वजह से युवाओं में उनकी अच्छी पकड़ बनी।

कांग्रेस में मजबूत पकड़

भूपेन बोरा लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे। पार्टी संगठन में उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया और धीरे-धीरे बड़े नेता बन गए। 2021 से 2024 तक वे असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर जोरदार आवाज उठाई।

मुख्यमंत्री Tarun Gogoi के कार्यकाल में उन्होंने संसदीय सचिव और सरकार के प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी निभाई। उनकी छवि एक मेहनती और जमीनी नेता की रही है।

विधायक के तौर पर पहचान

भूपेन बोरा 2006 से 2016 तक बिहपुरिया विधानसभा सीट से विधायक रहे। अपने क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे। स्थानीय लोगों से सीधा संवाद करना उनकी खासियत मानी जाती है।

असम की राजनीति में उनका प्रभाव खासकर ऊपरी असम के इलाकों में मजबूत माना जाता है।

कांग्रेस से दूरी क्यों?

हाल के वर्षों में कांग्रेस के अंदर गुटबाजी और संगठनात्मक कमजोरी की चर्चा होती रही है। माना जा रहा है कि इसी वजह से भूपेन बोरा पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। हालांकि कांग्रेस नेता Rahul Gandhi समेत कई नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन वे अपने फैसले पर अडिग रहे।

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अब चर्चा है कि वे 22 फरवरी को Himanta Biswa Sarma की मौजूदगी में बीजेपी जॉइन कर सकते हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बीजेपी उन्हें संगठन या चुनावी रणनीति में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।

कुल मिलाकर, भूपेन बोरा का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। छात्र नेता से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक और अब संभावित रूप से बीजेपी नेता बनने तक, उनका राजनीतिक करियर असम की सियासत में अहम मोड़ साबित हो सकता है।

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