भोपाल मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर को सुरक्षा मंजूरी मिलते ही काम दिन-रात किया जा रहा है।
Commissioner of Metro Rail Safety (CMRS) की मंजूरी के बाद मैनेजमेंट पर उद्घाटन की तैयारी का जबरदस्त दबाव है।सबसे ज़्यादा हलचल सुभाष नगर मेट्रो डिपो से AIIMS स्टेशन के बीच दिख रही है। रोज़ाना अधिकारियों की टीमें निरीक्षण कर रही हैं ताकि 13 दिसंबर की प्रस्तावित डेट से पहले सब कुछ दुरुस्त हो सके।
स्टेशन पर finishing का काम दो शिफ्टों में
मौके पर काम कर रहे मज़दूरों ने बताया कि अभी दो शिफ्ट में काम चल रहा है और वर्कर्स की संख्या भी दोगुनी कर दी गई है।
सुभाष नगर स्टेशन पर इलेक्ट्रिक पोलों में वायरिंग, रानी कमलापति, अलकापुरी और AIIMS स्टेशन पर फिनिशिंग, क्लीनिंग और तकनीकी काम तेजी से किया जा रहा है।
अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि कोई भी पेंडिंग हिस्सा उद्घाटन में रुकावट न बने।
जल्दबाज़ी में यात्री सुविधाएँ रह गईं अधूरी
मैनेजमेंट ने राज्य सरकार को उद्घाटन की तारीख 13 दिसंबर के लिए पत्र भेज दिया है, जिसके बाद पूरे कॉरिडोर में हलचल तेज़ है।
लेकिन इस जल्दबाज़ी में कई सुविधाएँ अधूरी दिख रही हैं—
- केवल एक स्टेशन पर ही एंट्री-एग्ज़िट गेट पूरी तरह बन पाए हैं।
- कई स्टेशनों के नीचे की सड़कें टूटी हुई और गड्ढों से भरी हैं।
- पार्किंग की व्यवस्था का कहीं नामोनिशान नहीं है।
इस कच्चे इंतज़ाम से यात्री सुरक्षा और सुविधा दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।
25–30% काम अब भी बाकी
अभी हालत यह है कि लगभग 25–30% कार्य अधूरा है।
इस देरी की सबसे बड़ी वजह मैनेजमेंट का ढीला रवैया और प्रोजेक्ट में लगातार टाइमलाइन ब्रेक होना है।
यह प्रोजेक्ट 2019 में शुरू हुआ था और 2021–22 में पूरा होना था, लेकिन कोविड के कारण समयसीमा बढ़ाई गई।
इसके बाद दो डेडलाइन और बढ़ीं, लेकिन काम रफ्तार नहीं पकड़ पाया और अब अक्टूबर 2025 की तीसरी डेडलाइन भी फिसल गई।
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तेज़ रफ्तार तैयारियाँ और उद्घाटन की उम्मीद
NOC मिलने के बाद काम में फिर से जान आ गई है।
हालाँकि मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से काम चौबीसों घंटे चल रहा है, उससे साफ है कि भोपाल मेट्रो 13 दिसंबर को पटरी पर उतर सकती है।
अब देखना यह है कि क्या प्रबंधन समय रहते बचा काम पूरा कर पाएगा या उद्घाटन से पहले यात्रियों को अधूरी सुविधाओं का सामना करना पड़ेगा।





