Betul Politics – एक विधानसभा ऐसी जहां जोड़ों ने बनाया रिकार्ड

पति-पत्नी दोनों को विधायक बनने का मिला अवसर

Betul Politicsबैतूल विधानसभा चुनाव के 71 साल के इतिहास में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित ऐसी कोई विधानसभा सीट मध्यप्रदेश में नहीं होगी जहां पति-पत्नी के दो जोड़े एक ही राजनैतिक दल की टिकट पर अलग-अलग समय में निर्वाचित हुए हैं। यह बात अलग है कि कोई इसे परिवारवाद से जोड़ रहा है तो कोई इन नेताओं की राजनैतिक ताकत और लोकप्रियता मान रहा है।

आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले की घोड़ाडोंगरी विधानसभा सीट एक मात्र ऐसी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट हो गई है जहां से पति-पत्नी के दो जोड़े एक ही राजनैतिक दल की टिकिट पर विधानसभा चुनाव जीते हैं। 2023 के पहले तक यह रिकार्ड भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व संसदीय सचिव मध्य प्रदेश शासन रामजी लाल उइके और उनकी पत्नी श्रीमती गीता रामजीलाल के नाम दर्ज था। इन जोड़ों के नाम एक रिकार्ड यह भी है कि इन चार में से तीन अपने समय में शिक्षक के रूप में कार्य कर चुके हैं।

रामजीलाल उइके का राजनैतिक सफर | Betul Politics

भारतीय जनता पार्टी का गठन 1980 में हुआ था। भाजपा के गठन के बाद हुए मध्य प्रदेश विधानसभा के पहले चुनाव में रामजीलाल उइके बैतूल जिले की अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित घोड़ाडोंगरी विधानसभा सीट से भाजपा की टिकट पर पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 1990 के चुनाव में पुन: भाजपा की टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए और पटवा सरकार में संसदीय सचिव बने। लेकिन 1985,1993 और 1998 के विधानसभा चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली और उनकी चुनावी राजनीति का समापन हो गया।

श्रीमती गीता रामजीलाल उइके भी बनी विधायक

रामजीलाल उइके के तीन चुनाव हारने के बाद पार्टी ने 2008 के चुनाव में उनकी पत्नी श्रीमती गीता रामजीलाल उइके को मैदान में उतारा और वे भाजपा की टिकट पर विधायक निर्वाचित हुई। इस तरह से इस विधानसभा सीट से पति-पत्नी के जोड़े के रूप में चुनाव जीतने वाला यह पहला जोड़ा बना। लेकिन गीता उइके को 2018 के चुनाव में सफलता प्राप्त नहीं हुई।

अजेय रहा सज्जनसिंह उइके का चुनावी सफर | Betul Politics

2003 में भाजपा ने घोड़ाडोंगरी विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बदलते हुए सज्जनसिंह उइके को चुनाव मैदान में उतारा और वे अपने जीवन के पहले ही चुनाव में सफल हुए और विधायक निर्वाचित हो गए। इसके बाद 2008 में उन्हें टिकट नहीं मिली लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव में पुन: सज्जनसिंह को भाजपा ने टिकट दी और वे निर्वाचित हो गए लेकिन वह अपना कार्यकाल पूर्ण करने के पूर्व ही उनका दुखद निधन हो गया।

श्रीमती गंगा सज्जनसिंह भी आ गई मैदान में

सज्जनसिंह के दुखद निधन के बाद 2016 में उपचुनाव हुआ लेकिन इसमें सज्जन सिंह के परिजनों को अवसर नहीं मिला। 2018 के विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी श्रीमती गंगा बाई सज्जन सिंह ने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की। लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दी और वे पार्टी की निष्ठावान सिपाही के रूप में राजनीति में सक्रिय रही जिसका फायदा उन्हें 2023 के विधानसभा चुनाव में मिला और वे अपने जीवन के पहले विधानसभा चुनाव में ही सफल हो गई। इस तरह से दोनों ही पति-पत्नी इस सीट से विधायक निर्वाचित हुए।

दो जोड़ों में तीन रहे शिक्षक | Betul Politics

राजनीति में आने के पूर्व से ही रामजीलाल उइके गुरुजी के नाम से लोकप्रिय रहे क्योंकि उन्होंने राजनीति में आने से पूर्व शिक्षक के रूप में कार्य किया था। इसी तरह से सज्जनसिंह उइके भी चुनाव लड़ने के पूर्व तक शिक्षक रहे थे। और वे सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने के बाद चुनाव लड़े थे।

इसी तरह सज्जनसिंह की पत्नी श्रीमती गंगाबाई भी शिक्षिका थीं और उन्हें सज्जनसिंह के निधन के बाद सरकार ने मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग का सदस्य बनाया था। और इसी के पूर्व उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। इस तरह से इस विधानसभा के निर्वाचित हुए दो जोड़ों में से तीन शिक्षक पद छोड़ने के बाद विधायक बने। संभवत: यह रिकार्ड भी मध्यप्रदेश की किसी और अन्य अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा के नाम नहीं है।