जिला अस्पताल में जानलेवा लापरवाही फिर आई सामने
Betul News – बैतूल – मातृ-शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए किए जा रहे सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। जिला अस्पताल में कविता बारस्कर नाम की प्रसूता को समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मृत बच्चे को जन्म दिया। इस बड़ी लापरवाही को लेकर परिजन डॉक्टर पर आरोप लगा रहे हैं तो जिला अस्पताल प्रबंधन इस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है और पूरा ठीकरा परिजनों पर ही फोड़ रहा है। इस मामले में जिला अस्पताल बैतूल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी के जो तर्क आए हैं वह भी अलग-अलग हैं जिससे साफ है कि इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही है।
यह है पूरा मामला
सारनी के शास्त्री नगर निवासी कविता बारस्कर उम्र 23 वर्ष प्रसूति के लिए कल सुबह घोड़ाडोंगरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। कविता के पति रविंद्र बारस्कर ने बताया कि प्रायवेट वाहन से घोड़ाडोंगरी पहुंचे थे जहां डॉक्टरों ने जांच की और कविता की हालत देखकर घोड़ाडोंगरी से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। लगभग 10 बजे जिला अस्पताल लेकर आए जहां भर्ती करने में देरी की गई। इसके बाद शाम तक उसको इलाज नहीं मिला। दोपहर से दर्द शुरू हो गया। इसके बाद शाम को 5 बजे से सोनोग्राफी के लिए ले जाया गया। तकलीफ होने के बाद भी ट्राइसाइकिल की जगह पैदल ही ले गए और सोनोग्राफी होने के पहले ही उसकी नार्मल डिलेवरी में मृत बच्चा पैदा हुआ।
समय पर नहीं हुआ सीजर | Betul News
कविता की डिलेवरी 10 अगस्त के आसपास होनी थी लेकिन एक माह पहले ही उसे दर्द हुआ और अस्पताल लेकर आए। कविता की नंद मंदाकिनी बारस्कर ने बताया कि घोड़ाडोंगरी में बोला गया था प्रसूति की दौरान सीजर की स्थिति बन सकती है इसलिए जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। मंदाकिनी का आरोप है कि जब लेकर आए उसके बाद ना तो सोनोग्राफी की गई और ना ही सीजर के लिए बोला गया। हम लोग चाह रहे थे कि आपरेशन हो जाए और बच्चा सुरक्षित पैदा हो जाए। लेकिन आपरेशन नहीं किया गया। जिससे बच्चा मृत पैदा हुआ।
प्री मैच्योर था बच्चा
जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ जगदीश घोरे का कहना है की कविता जब आई थी तो पता चला कि उसकी लिकिंग अधिक हो रही है। जो उसका गर्भ था वह 34 हफ्ते का था जिसे प्री मैच्योर माना जाता है। ड्यूटी के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा देखा गया और परिजनों को उसकी स्थिति बताई गई। इंजेक्शन भी लगाए। यह 4 इंजेक्शन 12-12 घंटे में लगाए जाते हैं। 48 घंटे इंतजार करना पड़ता है। महिला डॉक्टर ने सीजर के लिए कहा भी था लेकिन परिजन नार्मल डिलेवरी कराने पर अड़े रहे। उनकी सहमति के बाद उपचार चालू रखा। इसी दौरान मृत बच्चा पैदा हुआ।
37 हफ्ते का था गर्भ | Betul News
इस लापरवाही के मामले में जिला अस्पताल की जांच रिपोर्ट के विपरित घोड़ाडोंगरी जांच रिपोर्ट आई है। सबसे पहले जांच करने वाली स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कविता कोरी ने बताया कि कविता की डिलेवरी लगभग 10 अगस्त के आसपास होनी थी और 37 हफ्ते का गर्भ था। अगर जिला अस्पताल वाले 34 हफ्ते का बता रहे हैं तो उन्हें सोनोग्राफी कराना चाहिए थी। और बच्चे की स्थिति भी चेक करनी चाहिए थी। अगर उसकी सांस में कोई तकलीफ थी तो दर्द के इंजेक्शन देकर डिलेवरी कराई जानी थी।






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