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भोले बाबा और श्रीकृष्ण की कथा में कन्हैया की चतुराई का सुंदर प्रसंग – देवी कीर्ति किशोरी
खबर वाणी न्यूज़, रफीक
सारनी। कथा वाचन के दौरान देवी कीर्ति किशोरी जी ने भोले बाबा और श्रीकृष्ण कन्हैया से जुड़ा एक रोचक व शिक्षाप्रद प्रसंग सुनाया, जिसमें कन्हैया जी की चतुराई का सुंदर वर्णन किया गया।
कथा में बताया गया कि माता पार्वती से विवाह के पश्चात एक दिन उन्होंने भोले बाबा से कहा कि नाथ, आपके पास एक नंदी तो है, यदि दूसरा नंदी हो जाए तो आप खेती कर सकते हैं। इस पर भोले बाबा ने असमर्थता जताई। तब माता पार्वती ने सुझाव दिया कि श्रीकृष्ण कन्हैया को साथ में तैयार किया जाए।
भोले बाबा श्रीकृष्ण के पास पहुंचे और खेती का प्रस्ताव रखा। कन्हैया जी तैयार हो गए, लेकिन बटवारे की शर्त रखी। भोले बाबा ने कहा कि खेत की ऊपर की फसल मेरी होगी और नीचे की फसल तुम्हारी। कन्हैया जी ने सहमति जताते हुए खेत में आलू की फसल बो दी। फसल पकने पर आलू अपने पास रख लिए और डंठल कैलाश भिजवा दिए। माता पार्वती ने यह देखकर भोले बाबा को समझाया कि आपने ऊपर की फसल अपनी बताई थी।
इसके बाद दूसरी बार शर्त बदली गई कि नीचे की फसल हमारी और ऊपर की कन्हैया की होगी। इस बार कन्हैया जी ने ज्वार की फसल बो दी। फसल तैयार होने पर अनाज अपने पास रख लिया और डंठल फिर कैलाश भेज दिए, जिससे माता पार्वती पुनः नाराज हो गईं।
तीसरी बार तय हुआ कि ऊपर और नीचे दोनों फसल हमारी होंगी। कन्हैया जी ने इस बार मक्के की फसल बो दी। फसल पकने पर मक्का अपने पास रख लिया और घास-फूस व डंठल कैलाश भिजवा दिए। यह देखकर माता पार्वती ने कहा कि नाथ, खेती करना आपके बस की बात नहीं है, आप कैलाश पर बैठकर राम नाम का ही जप करें।
कथा में देवी कीर्ति किशोरी जी ने इस प्रसंग के माध्यम से श्रीकृष्ण की बुद्धिमत्ता, चतुराई और लीला का सुंदर वर्णन किया।
कथा कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे, भाजपा जिला अध्यक्ष सुधाकर पवार सहित अनेक श्रद्धालु व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।





