कथावाचक Aniruddhacharya एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में अब उनके खिलाफ अदालत में केस दर्ज हो चुका है। देखते हैं कौन हैं अनिरुद्धाचार्य और क्या है पूरा मामला।
अनिरुद्धाचार्य पर दर्ज हुआ मामला
आगरा की भारत हिन्दू महासभा की जिलाध्यक्ष मीरा राठौर ने CJM कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। अब अनिरुद्धाचार्य को कोर्ट में जवाब देना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 1 जनवरी 2026 को होगी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद मामला और तूल पकड़ गया।
कौन हैं कथावाचक अनिरुद्धाचार्य?
अनिरुद्धाचार्य का असली नाम अनिरुद्ध राम तिवारी है। उनका जन्म 27 सितंबर 1989 को मध्य प्रदेश के दमोह जिले के रिनवांझा गांव में हुआ। उनके पिता राम नरेश तिवारी मंदिर के पुजारी हैं। शुरुआती पढ़ाई पूरी करने से पहले ही वे वृंदावन आ गए, जहां उन्होंने वेद, पुराण और धार्मिक ग्रंथों की शिक्षा ली।वर्तमान में वे वृंदावन में रहते हैं और गौरी गोपाल आश्रम के संस्थापक हैं। यह आश्रम वृद्ध सेवा, भोजन वितरण और पशु सेवा जैसे सामाजिक कार्य भी करता है।
परिवार और लोकप्रियता
अनिरुद्धाचार्य की पत्नी आरती तिवारी हैं, जिन्हें भक्त “गुरु मां” के नाम से बुलाते हैं। वे भजन गायिका हैं और अधिकतर सत्संग कार्यक्रमों में अनिरुद्धाचार्य के साथ दिखती हैं।
अनिरुद्धाचार्य आज के समय में सबसे लोकप्रिय संतों और कथावाचकों में गिने जाते हैं। उनकी भागवत कथा और प्रवचन देशभर में लाखों भक्त सुनते हैं।
पहले भी कई बार रहे विवादों में
अनिरुद्धाचार्य का नाम विवादों से नया नहीं है।
कभी उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को रामायण के अस्त्र-शस्त्र से जोड़कर चर्चा बटोरी, तो कभी बिस्किट को ‘जहर की किट’ बताने पर उनका खूब मज़ाक बना।
लिव-इन रिलेशनशिप पर उनका बयान भी सुर्खियों में रहा।
संविधान और गीता पर दिए पॉडकास्ट बयान ने भी उन्हें विवादों में धकेला था।
महिलाओं पर टिप्पणी का पूरा मामला
विवाद तब शुरू हुआ जब एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे कहते दिखे कि “आजकल लड़कियों की शादी 25 साल में हो रही है, तब तक वे कई जगह ‘छुड़ाई’ जा चुकी होती हैं।”
इस बयान को महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताया गया और विरोध शुरू हो गया। शिकायत दर्ज होने के बाद अब मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है।
हालांकि बाद में अनिरुद्धाचार्य ने सफाई देते हुए कहा कि उनका बयान तोड़ा-मरोड़ा गया और वे महिलाओं का सम्मान करते हैं।





