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आमला कुर्सी पर ‘साहब’ नहीं, फरियादी की किस्मत में सिर्फ ‘इंतजार’: आमला नपा कार्यालय राम भरोसे; समय पर न कर्मचारी मिलते हैं, न ही जिम्मेदार अधिकारी
आमला नपा का बुरा हाल: दोपहर 3 बजे ही खाली हो गया दफ्तर, फोन लगाने पर सीएमओ ने भी साधी चुप्पी; बार-बार चक्कर काटने को मजबूर नागरिक
आमला। नगर पालिका कार्यालय इन दिनों अपनी बदहाल कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। शासन की मंशा है कि आमजन के काम त्वरित हों, लेकिन आमला नपा में इसके उलट नजारा दिख रहा है। यहाँ कार्यालयीन समय में भी कर्मचारी और अधिकारी अपनी कुर्सियों से नदारद रहते हैं, जिसके चलते पूरा कार्यालय ‘भगवान भरोसे’ चल रहा है।
बुधवार दोपहर 3 बजे खाली मिला दफ्तर
ताजा मामला बीते बुधवार का है, जब दोपहर 3 बजे कार्यालय का निरीक्षण किया गया तो नजारा चौंकाने वाला था। अधिकांश कर्मचारी अपनी सीटों पर नहीं थे। हद तो तब हो गई जब सीएमओ नितिन बिंजवे सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी भी नदारद मिले। इस संबंध में जब सीएमओ को उनके मोबाइल पर कॉल किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा।
जनता की बढ़ी मुसीबतें
दूर-दराज से आने वाले ग्रामीण और स्थानीय नागरिक जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जलकर, संपत्ति कर और नामांतरण जैसे जरूरी कार्यों के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। नागरिकों का कहना है कि बायोमेट्रिक हाजिरी और रजिस्टर होने के बावजूद समय की पाबंदी नहीं है। एक छोटे से काम के लिए कई-कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय लोगों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि लापरवाह कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो वे उच्चाधिकारियों से शिकायत कर उग्र आंदोलन करेंगे।




