खबरवाणी
आमला पिता के वचन झूठ ना हो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने स्वेच्छा से वनवास के लिए किया प्रस्थान
आमला:- हनुमान मंदिर परिसर नांदपुर में चल रही श्री रामकथा में छठवें दिन रविवार को अत्यंत मार्मिक और भावविभोर कर देने वाली कथा का वर्णन हुआ हुआ जब अयोध्या में खुशियों पर अचानक वियोग की छाया पड़ गई कथावाचक पंडित धीरेंद्र आचार्य द्वारा वियोग की कथा का सूत्रपात करते हुए बताया कि माता कैकेई द्वारा मांगी गए दो वरदान के चलते मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम राजतिलक की तैयारी की जगह पिता की वचन को पूरा करने के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम द्वारा स्वेच्छा से वनवास स्वीकार कर लिया यह प्रसंग केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं बल्कि धर्म वचन और त्याग की सर्वोच्च मिसाल की कथा है कथा में जैसे ही घटना आगे बड़ी श्रोताओं में अनुभव किया कि श्री राम का वनगमन किसी मजबूरी का परिणाम नहीं बल्कि पिता के वचनों की मर्यादा और धर्म की रक्षा का संकल्प लक्ष्मण एवं माता सीता के साथ राम का वन की ओर प्रस्थान करुणा सास और आदर्श पारिवारिक मूल्य का जीवंत चरित्र प्रस्तुत करता है स्वामी धीरेंद्र आचार्य ओजस्वी वाणी और भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को उस युग में पहुंचा दिया, जहां त्याग ही सबसे बड़ा आभूषण था
कथा में माता सीता व लक्ष्मण के साथ चित्रकूट की ओर प्रस्थान किया भगवान राम
हनुमान मंदिर परिसर में चल रही राम कथा आज की कथा में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ,माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ गंगा नदी पार करने के बाद चित्रकूट की ओर प्रस्थान किया यह यात्रा उनके वनवास के समय की थी जब धर्म त्याग एवं सत्य प्रतिमूर्ति मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम अपने पिता की वचनों का पालन करने हेतु अयोध्या से वन की ओर चल पड़े चित्रकूट का या क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्यता और धार्मिक महत्व से परिपूर्ण है यहां के घने जंगल, शांत नदी और हरियाली ने भगवान राम, सीता माता और लक्ष्मण को सुकून और ध्यान का अवसर प्रदान किया। स्थानीय जनमानस ने उनका स्वागत किया। राम की सरलता, सीता माता की शील और लक्ष्मण की भक्ति की छवि यहां हर किसी के हृदय में बस गई। इस पवित्र स्थल पर भगवान राम ने वनवास के दौरान अनेक धर्मोपदेश दिए और जीवन के आदर्श स्थापित किए।
भजन-संगीत पर नृत्य कर श्रद्धालुओं ने प्रकट किया भक्तिभाव
रामकथा में भजन-संगीत दल की प्रस्तुती के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव की अद्भुत झलक पेश की। योगेश महाराज के साथ आए कलाकारों के दल ने जब रामकथा के बीच में भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी, तो भक्तों ने भजनों पर नृत्य कर अपनी आस्था और प्रेम प्रकट किया। इस अवसर पर योगेश महाराज ने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल धार्मिक संस्कृति का संवर्धन होता है, बल्कि समाज में एकता और सहयोग की भावना भी बढ़ती है।
मंथरा से प्रेरित होकर कैकेई ने मांगे दो वरदान
श्री राम कथा वाचक पंडित स्वामी धीरेंद्र आचार्य ने बताया कि मंथरा के भड़काने पर कैकेई का मन बदल गया और वह अपने पूर्व प्रेम, त्याग और विवेक को भूल बैठी। मंथरा ने उसे याद दिलाया यदि राम राजा बने तो भरत सदा उनके अधीन रहेंगे और कैकेई का प्रभाव समाप्त हो जाएगा। इस भय से कैकेई ने राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगने का निश्चय किया। उसने स्मरण कराया युद्ध के समय दशरथ ने उसे दो वरदान देने का वचन दिया था। प्रथम वरदान में उसने भरत को अयोध्या का राजा बनाने की मांग की और दूसरे वरदान में राम को चौदह वर्षों के लिए बनवास भेजने का आग्रह किया।






