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साईंखेड़ा में रासायनिक पानी से गन्ने की सिंचाई का आरोप, ग्रामीणों में दहशत

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खबरवाणी

साईंखेड़ा में रासायनिक पानी से गन्ने की सिंचाई का आरोप, ग्रामीणों में दहशत 

साईंखेड़ा। क्षेत्र में संचालित गिरिराज शुगर मिल एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि मिल से निकलने वाला रासायनिक अपशिष्ट पानी खुले में छोड़ा जा रहा है और उसी पानी का उपयोग गन्ने की फसल की सिंचाई में किया जा रहा है।
ग्रामीणों का दावा है कि जिस पानी की सतह पर मक्खियां बैठकर मर जा रही हैं, वही पानी खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे पूरे गांव में भय और आक्रोश का माहौल है।
मामला
1 रासायनिक पानी का बहाव
ग्रामीणों के अनुसार मिल परिसर से काला, बदबूदार और झागयुक्त पानी लगातार बहकर खेतों की ओर जा रहा है।
2 मक्खियों के मरने का दावा
स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी पर बैठते ही मक्खियां मर जाती हैं, जिससे उसमें जहरीले तत्व होने की आशंका जताई जा रही है।
3 लीज पर ली गई जमीन
आरोप है कि मिल प्रबंधन ने करीब 2 एकड़ जमीन लीज पर लेकर वहां गन्ने की फसल बो रखी है, ताकि उसी रासायनिक पानी का उपयोग सिंचाई में किया जा सके और बाहरी लोगों को जानकारी न हो।
4 ट्रीटमेंट प्लांट पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि मिल के पास अपशिष्ट जल को शुद्ध करने का कोई प्रभावी साधन नहीं है, या यदि है तो उसका उपयोग सही तरीके से नहीं किया जा रहा।
5 स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका
गांव के लोगों को डर है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा तो दमा, त्वचा रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
6 दबाव में ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि जब भी वे इस मुद्दे को उठाते हैं, तो जनप्रतिनिधियों द्वारा उन्हें दबाया जाता है, जिससे खुलकर शिकायत करना मुश्किल हो जाता है।
7 पानी चोरी का भी आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि इस मामले की शिकायत एसडीओ चिंजोरीलाल मरकाम से कई बार की गई, जिसमें पानी चोरी का मुद्दा भी उठाया गया। उनका कहना है कि एसडीओ द्वारा हर बार “मैं देखता हूं” कहकर मामला टाल दिया जाता है।
संभावित प्रभाव
भूमिगत जल स्रोत दूषित होने की आशंका
मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने का खतरा
जहरीली फसल बाजार तक पहुंचने की संभावना
पशु-पक्षियों और मानव स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव
प्रशासन से मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मांग की है कि:
मिल के अपशिष्ट जल की तत्काल जांच हो
पानी और मिट्टी के सैंपल की लैब टेस्टिंग कराई जाए
यदि आरोप सही पाए जाएं तो मिल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई हो
गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाकर जांच कराई जाए
बड़ा सवाल
क्या लाभ के लिए पर्यावरण और ग्रामीणों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है?
क्या संबंधित विभाग इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेंगे?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है।

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