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ऑल इज़ वेल के डॉक्टरों को मिली सफलता , यह सफलता रिसर्च अंतरराष्ट्रीय जर्नल में दर्ज 
बुरहानपुर :— ग्रामीण क्षेत्रों में सांड के हमले और सांप काटने जैसे जटिल मामलों में ऑल इज़ वेल के डॉक्टरों को बड़ी सफलता मिली है। इस सफलता को रिसर्च अंतरराष्ट्रीय जर्नल में दर्ज किया गया है। यह हादसे कई बार गर्भवती महिलाओं के लिए अत्यंत खतरनाक साबित होते हैं। ऐसे ही दो गंभीर मामलों में शहर के मध्य भारत के सबसे बड़े मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल ऑल इज़ वेल के डॉक्टरों ने समय रहते इलाज कर दो गर्भवती महिलाओं की जान बचाने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस महत्वपूर्ण चिकित्सा कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और इस केस स्टडी को अंतरराष्ट्रीय रिसर्च जर्नल की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है।
हॉस्पिटल के चिकित्सकों के अनुसार पहला मामला 24 वर्षीय गर्भवती महिला का था, जिस पर एक सांड ने हमला कर दिया था। हमले के कारण उसके पेट और गर्भाशय में गंभीर चोट आई और अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। हॉस्पिटल पहुंचने पर महिला की स्थिति अत्यंत गंभीर थी और वह हेमोरेजिक शॉक की अवस्था में पहुंच गई थी। ऐसे में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत आपातकालीन उपचार शुरू किया, रक्त चढ़ाया गया और सर्जरी के माध्यम से रक्तस्राव को नियंत्रित किया गया। समय पर किए गए उपचार से महिला की जान बचाने के साथ-साथ गर्भाशय को भी सुरक्षित रखा गया। दूसरा मामला 22 वर्षीय गर्भवती महिला का था, जो गर्भावस्था के लगभग 12वें सप्ताह में थी। उसे जहरीले सांप कॉमन क्रेट ने काट लिया था, जिसके कारण उसके शरीर में तेजी से जहर फैल गया और उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। डॉक्टरों ने तुरंत उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा और एंटी-स्नेक वेनम सहित आवश्यक उपचार शुरू किया। लगातार निगरानी और गहन चिकित्सा देखभाल के बाद महिला की स्थिति में सुधार हुआ और उसकी जान बचाई जा सकी।
इस उपचार प्रक्रिया में डॉ. मोनिश गुप्ता (स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ) और डॉ. दिव्यांश लाड़ (इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। हॉस्पिटल की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्रीमती देवांशी चौकसे ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे हादसे अचानक सामने आते हैं, इसलिए समय पर हॉस्पिटल पहुंचना और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिलना बेहद आवश्यक होता है।चिकित्सकों का कहना है कि आधुनिक क्रिटिकल केयर और त्वरित चिकित्सा प्रबंधन की मदद से अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में भी मरीजों की जान बचाई जा सकती है। इन दोनों मामलों की सफलता यह दर्शाती है कि सही समय पर उचित इलाज मिलने से जीवन को सुरक्षित रखा जा सकता है।





