Airless Tyres यानी ऐसे टायर जिन्हें हवा भरने की जरूरत नहीं पड़ती। ऑटोमोबाइल दुनिया में अब ट्यूब टायर के बाद ट्यूबलेस टायर आए और अब अगला कदम माना जा रहा है Airless Tyres को। इन टायरों में रबर और मजबूत सिंथेटिक मटेरियल से बना एक ऐसा स्ट्रक्चर होता है जो टायर को आकार और मजबूती देता है। इन टायरों के अंदर स्पोक्स जैसे डिज़ाइन होते हैं जो दूर से देखने पर ही इन्हें भविष्य की तकनीक जैसा बनाते हैं।
Puncture का झंझट खत्म
Airless Tyres का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये कभी पंचर नहीं होते। सड़क पर कील हो, कांच के टुकड़े हों या कोई नुकीली चीज टायर को नुकसान नहीं पहुंचा सकती क्योंकि इनमें हवा होती ही नहीं। यही वजह है कि इन्हें लो मेंटेनेंस टायर भी कहा जा रहा है। गाड़ी चलाते समय अचानक टायर पंक्चर होने और सड़क किनारे रुकने की दिक्कत से पूरी तरह छुटकारा मिलता है।
कितनी लंबी होती है इनकी लाइफ
टायर की लाइफ हर ड्राइवर जानना चाहता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार Airless Tyres लगभग 80 हजार से 1 लाख किलोमीटर तक आराम से चल सकते हैं। वहीं सामान्य Tubeless Tyres औसतन 50 हजार से 70 हजार किलोमीटर तक चलते हैं। हालांकि टायर की लाइफ इस बात पर भी निर्भर करती है कि सड़क कैसी है, गाड़ी कैसे चलाई जाती है और मेंटेनेंस सही है या नहीं।
Tubeless Tyres कैसे काम करते हैं
Tubeless Tyres में अलग से ट्यूब नहीं होता बल्कि रिम और टायर के बीच हवा सील हो जाती है। अगर टायर में किसी नुकीली चीज से छेद हो जाए तो हवा धीरे धीरे निकलती है जिससे गाड़ी पर कंट्रोल बना रहता है। इसी वजह से Tubeless Tyres को पुरानी ट्यूब टायर तकनीक से ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। लेकिन Airless तकनीक के आने के बाद एक बार फिर टायर इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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Airless Tyres महंगे लेकिन फ्यूचर टेक्नोलॉजी
Airless Tyres के फायदे बहुत हैं जैसे पंक्चर का डर खत्म अचानक टायर फटने का जोखिम नहीं हवा चेक करने या भरवाने की जरूरत नहीं ज्यादा लंबी लाइफ और कम रबर वेस्ट। लेकिन इनके कुछ नुकसान भी हैं जैसे कीमत ज्यादा होना हाई स्पीड पर थोड़ा शोर महसूस होना और अभी यह तकनीक हर गाड़ी में उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद इसे आने वाले समय की सबसे आधुनिक टायर तकनीक माना जा रहा है।





