दुनिया के बड़े टेक उद्योगपति Elon Musk ने हाल ही में दावा किया कि आने वाले 10–20 सालों में AI और रोबोटिक्स इतने आगे बढ़ जाएंगे कि इंसानों के लिए काम करना “ज़रूरी” नहीं रहेगा। यानी ऑफिस जाने का टेंशन खत्म, और लोहे-मशीनों वाला दौर शुरू। अमेरिका से लेकर चीन तक, हर जगह मानवरूपी रोबोट का विकास तेज़ रफ़्तार से बढ़ रहा है। ये रोबोट खतरनाक खदानों से लेकर मनहोल साफ़ करने तक, हर जोखिमभरा काम आराम से कर सकेंगे।
जब AI सब काम कर देगा, तो असली करेंसी क्या होगी?
आज इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा हिस्सा—कमाई। लेकिन जब खाना, घर, सफाई, गाड़ी चलाना—सब कुछ रोबोट करेंगे, तब सवाल उठता है:
किस चीज़ की वैल्यू बचेगी? पैसा, डेटा या एल्गोरिद्म?
कई अर्थशास्त्री मानते हैं कि AI दुनिया की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदल देगा। स्टॉक मार्केट में भी AI बॉट फैसले लेने लगेंगे। तब असली करेंसी शायद डेटा, समय और तकनीक बन जाए। यह भी संभव है कि देश की ताकत उसकी सेना नहीं, उसके AI सिस्टम तय करें।
2047 का भारत कैसा दिखेगा—फैक्ट्रियों में इंसान या रोबोट?
सोचिए—जब भारत आज़ादी के 100 साल पूरे करेगा, तब दफ्तरों और फैक्ट्रियों में किसकी धूम होगी?
मानवरूपी रोबोट ऑफिस बॉयस से लेकर बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन तक के काम करेंगे। ड्राइवरलेस कारें सड़क पर दौड़ेंगी और किचन में खाना मशीनें पकाएँगी। जनरेटिव AI वाले रोबोट 24 घंटे बिना थके काम करेंगे और कई गुना तेज़ प्रोडक्शन दे पाएंगे। यानी आने वाले समय में उद्योगों का चेहरा मशीनों के भरोसे होगा।
भारत में AI रोबोट: 25 हजार में टीचर और रेस्टोरेंट में वेटर
पिछले दो सालों में भारत में भी AI रोबोट का चलन तेज हो गया है।
लखनऊ के एक रेस्टोरेंट में दो रोबोट वेटर लगाए गए, जो ग्राहकों की पसंद–नापसंद तक याद रखते थे। वहीं यूपी के बुलंदशहर में 17 साल के अदित्य ने एक AI टीचर बनाया। यह LLM–चिपसेट पर आधारित है और 6वीं से 12वीं तक के बच्चों के सवालों के जवाब देता है। इस AI-शिक्षक की कीमत भी सिर्फ करीब 25,000 रुपये है।
कंपनियों की दौड़: कम समय में ज्यादा उत्पादन
आज दुनिया भर में कंपनियाँ मानवरूपी रोबोट को इसलिए अपना रही हैं क्योंकि वे इंसानों से कई गुना सस्ते और तेज़ हैं। चीन की कई बड़ी कंपनियाँ तो बेहद सस्ते रोबोट बनाने में लगी हुई हैं। निर्माण, सर्विस सेक्टर, पैकेजिंग, सिक्योरिटी—हर जगह AI रोबोट की एंट्री हो चुकी है।
आने वाले वर्षों में ऑफिसों में इंसानों से ज़्यादा रोबोट देखने को मिलें, तो इसमें कोई हैरानी नहीं होगी।





