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साईखेडा में बिना किसी डिग्री के एलोपैथिक उपचार कर रहा है झोलाछाप डाक्‍टर

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खबरवाणी

साईखेडा में बिना किसी डिग्री के एलोपैथिक उपचार कर रहा है झोलाछाप डाक्‍टर

मुलताई। क्षेत्र में झोलाछाप डाक्‍टरों की बाढ आई हुई है। जिस गांव में देखो उस गांव में 2-3 झोलाछाप डाक्‍टर आपकों आसानी से ग्रामीणों का एलोपैथिक पद्वति से उपचार करते हुए मिल जाएगें। जो कि मरीजों को एलोपैथिक दवाई देकर इंजेक्‍शन लगाकर मरीजों की जान खतरे में डालतें है और मरीजों से फीस के रूप में मोटी राशि वसूल करते है। ग्रामों में इन डाक्‍टरों के बोर्ड तो लगें होते है लेकिन बोर्ड पर किसी प्रकार की डिग्री या डिप्‍लोमा का उल्‍लेख नही रहता है। ऐसा ही कुछ मामला ब्‍लाक के ग्राम थाना साईखेडा में देखने में आया है। जहां पर गव्‍हाडे हेल्‍थ केयर साईखेडा के नाम से क्लिनिक खोलकर धडल्‍ले से मरीजों का उपचार किया जा रहा है। इस संबध में जब उपचार करने वाले डाक्‍टर करण कुमार गव्‍हाडे से चर्चा की गई तो उन्‍होने बताया कि मै ड्रेसर हॅू लोगो का इलाज कर सकता हॅू। इस संबध में जब उनके क्लिनिक में रखी डिग्री देखी गई तो अटल बिहारी वाजपेयी हिन्‍दी विश्‍वविघालय भोपाल की पत्रोपाधि के रूप में एक प्रमाण पत्र करन कुमार गव्‍हाडे पिता नरसिगं राव गव्‍हाडे के नाम पर दिखाई दिया तथा एक प्रमाण पत्र में प्राथमिक चिकित्‍सा उपचार पत्रोपाधि का दिखाई दिया जबकि क्लिनिक के अंदर एक महिला को बाटल लगाकर एलोपैथिक पद्वति से करते नजर आए । इस तरह उनके पास एलोपैथिक पद्वति से उपचार करने की कोई डिग्री नही होने के बाद भी मरीजों का उपचार कर मानव जीवन से खिलवाड किया जा रहा है। इस सबंध में जब सीएमएचओ डाक्‍टर मनोज हुडमाडे से चर्चा की गई तो उन्‍होने कहा कि ड्रेसर एक पद होता है कोई डिग्री नही होती है उस डाक्‍टर से आप पुछे कि वह कौन से अस्‍पताल में ड्रेसर के पद पर कार्यरत है। आप उनकी लोकेशन भिजवाए मै कार्रवाई करता हॅू।

बिना रजिस्‍ट्रेशन एवं बिना डिग्री से किया जा रहा है उपचार

साईखेडा में डाक्‍टर करण कुमार द्वारा बिना किसी रजिस्‍ट्रेशन एवं डिग्री के उपचार किया जा रहा है। इस संबंध में बीएमओं डाक्‍टर गजेन्‍द्र मीणा से चर्चा की गई तो उन्‍होने बताया कि किसी चिकित्‍सक को अपना व्‍यवसाय प्रांरभ करने के लिए किसी मान्‍यता प्राप्‍त विश्‍वविघायल से ऐलोपैथिक, होमयोंपैथिक अथवा आयुवैदिक डिग्री प्राप्‍त करना आवश्‍यक है। उसके उपंरात उस डिग्री के अनुसार सर्वप्रथम विश्‍वविघालय में रजिस्‍ट्रेशन किया जाता है उसके बाद जिला चिकित्‍सा अधिकारी से अनुमति प्राप्‍त करना होता है। इन प्राथमिकता के उपरांत ही वह अपना व्‍यवसाय कर सकता है। चिकित्‍सक द्वारा जिस पद्वति में डिग्री प्राप्‍त की गई है वह उसी पद्वति का ही उपचार कर सकता है। रजिस्‍ट्रेशन अथवा डिग्री नही होने की दशा में उपचार करना अपराध की श्रेणी में आता है जिस पर क्लिनिक सील बंद एवं एफआईआर की जाती है जिसमें कम से कम 6 मास का कारावास का प्रावधान है।

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