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30 हजार का इनामी और आजीवन कारावास का शातिर बंदी अलवर से गिरफ्तार, 8 माह से था फरार
पहचान छुपाने के लिए बदलता था ठिकाने, पुलिस को चकमा देने के लिए नहीं रखता था खुद का मोबाइल
नरसिंहपुर। पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद जेल वापस न लौटकर पिछले 8 महीनों से फरार चल रहे बलात्कार के सजायाफ्ता बंदी धनराज को पुलिस ने राजस्थान के अलवर रेलवे स्टेशन से घेराबंदी कर दबोच लिया है। शातिर बंदी अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था और तकनीकी सर्विलांस से बचने के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी नहीं कर रहा था। एडीजी जबलपुर जोन द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी पर 30 हजार रुपये का नकद इनाम घोषित किया गया था।
पैरोल लेकर हुआ था फरार
जानकारी के अनुसार, ग्राम पाथरी (जिला छिंदवाड़ा) निवासी बंदी धनराज पिता मंगल सिंह बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था और केंद्रीय जेल नरसिंहपुर में निरुद्ध था। उसे 28 जून 2025 को 16 दिनों की पैरोल मिली थी, जिसके बाद उसे 13 जुलाई 2025 को जेल वापस लौटना था। निर्धारित समय पर वापस न आने पर जेल अधीक्षक की सूचना पर थाना स्टेशनगंज में धारा 262 बी.एन.एस. के तहत मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की गई थी।
पकड़े जाने के डर से अपनाई शातिर रणनीति
पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने बताया कि बंदी गिरफ्तारी से बचने के लिए बेहद शातिर तरीके अपना रहा था:
नो मोबाइल पॉलिसी: वह स्वयं का मोबाइल नहीं रखता था। परिजनों से बात करने के लिए वह राहगीरों या परिचितों के फोन का सहारा लेता था।
लगातार स्थान परिवर्तन: पुलिस को गुमराह करने के लिए वह किसी भी स्थान पर 8-10 दिन से अधिक नहीं रुकता था। उसने मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के कई जिलों में छिपकर समय काटा।
मजदूरी और मुफ्त भोजन: वह ऐसे स्थानों का चयन करता था जहाँ मुफ्त भोजन मिल सके और शराब के खर्च के लिए छिटपुट मजदूरी करता था।
तीन राज्यों में दी दबिश, रेलवे स्टेशन पर हुई घेराबंदी
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसडीओपी नरसिंहपुर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने मथुरा, वृन्दावन समेत यूपी और एमपी के कई ठिकानों पर दबिश दी। मुखबिर तंत्र से सूचना मिली कि आरोपी राजस्थान के अलवर में छिपा है। जब पुलिस टीम वहाँ पहुँची, तो आरोपी को भनक लग गई और वह भागने के लिए अलवर रेलवे स्टेशन पहुँच गया। हालांकि, मुस्तैद पुलिस टीम ने समय रहते घेराबंदी की और उसे धर दबोचा।
इनकी रही मुख्य भूमिका
इस सफल कार्रवाई में निरीक्षक किशोर वामनकर, उनि अनिल अजमेरिया, गौरव नोमा, प्रधान आरक्षक अशीष मिश्रा, देवेन्द्र सिंह, आरक्षक संजय पांडे, जितेन्द्र ठाकुर, पुष्पराज बागरी, भूपेन्द्र नवरेती और महिला आरक्षक कुमुद पाठक सहित राजस्थान पुलिस के आरक्षक मानसिंह चौधरी की सराहनीय भूमिका रही।





