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भगत सिंह बस्ती मूलतापी में हुआ भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन
मुलताई। नगर की भगतसिंह बस्ती
में रविवार को विशाल हिन्दू सम्मेलन का आयोजन गढ़ेकर ग्राउंड मे हुआ। जिसमें मातृ शक्ति सहित लगभग 3500 से 4000 की संख्या में हिन्दू समाज एकत्रित था। कार्यक्रम की शुरुआत कलश यात्रा से हुई जिसमें ड्रीमलैंड ताप्ती नगरी और बाबा रामदेव के मंदिर से बड़ी संख्या में मातृ शक्तिया ध्वज और कलश लिए बड़े उत्साह से निकली शोभायात्रा में नन्ही मुन्नी बच्ची झांसी की रानी लक्ष्मीबाई भारत माता ,प्रभु राम ,ताप्ती माता ,भगत सिंह बनकर बग्गी और घोड़े पर थे, जो शोभा यात्रा का आकर्षण का केंद्र था जगह-जगह यात्रा का हिंदू समाज ने फूलों से स्वागत किया। आयोजन स्थल पर जागो तो जागो एक बार हिंदू जागो तो श्री राम दरबार खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी आदि के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी लोगों का मन मोह लिया।मंच पर उपस्थित प्रेम नारायण राजपूत नर्मदा पुरम विभाग के सह विभाग कारवाह और प्रतिभा ठाकुर राष्ट्रीय सेविका संघ की सदस्य ने अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने उपस्थित सम्पूर्ण हिन्दू समाज से जातपात से ऊपर उठकर एक हिन्दू, श्रेष्ठ हिन्दू और और पांच परिवर्तन का विषय रखा दीदी ने कुटुंब प्रबोधन पर लोगों से अपील की कि वह अपनी वेशभूषा अपना खान-पान अपना रहन-सहन अपने धर्म अपनी संस्कृति के अनुरूप अपनाने के लिए आग्रह किया सभी मातृ शक्तियों से अपने बच्चों को हिंदू रीति रिवाज की शिक्षा देने पर भी जोर दिया,मुख्य वक्ता प्रेम नारायण ने संघ की 100 वर्ष की यात्रा एवं सभी महापुरुषों के बारे में बताएं कैसे मोहम्मद गजनबी ने हमारे मंदिर तोड़े कैसे वीर पृथ्वीराज चौहान ने युद्ध लड़े लक्ष्मीबाई ,मंगल पांडे, भगत सिंह इन क्रांतिकारियों की वजह से हमें आजादी मिली।उन्होंने कहा कि संघ के 100 वर्ष तो पूर्ण हो गए पर उद्देश्य अभी भी अपूर्ण है। सारे हिन्दू अभी भी वन्देमातरम बोलने के लिए तैयार नहीं है। समस्या का पता सभी को है और निराकरण भी सबको पता है, पर गले में घंटी बांधने को कोई तैयार नहीं है। इसीलिए यदि विश्व में शान्ति लाना है तो सारे हिंदुओं को एक होना होगा, तभी संघ का उद्देश्य पूर्ण होगा।
उन्होंने समाज में उत्पन्न कुरीतियों को समाप्त कर उपस्थित हिन्दू समाज से एक होने का आग्रह किया। प्रमोद ठाकरे ने सबका आभार व्यक्त किया. मंच संचालन राजेंद्र सिंह ठाकुर दिनेश जी दबाने ने किया।कार्यक्रम का समापन भारत माता आरती के बाद
और सहभोज के साथ हुआ।





