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डॉक्टर विहीन भौंरा स्वास्थ्य केंद्र पर उठा बड़ा सवाल
एसआरआई समीक्षा के दौरान आयुक्त,कलेक्टर के समक्ष गूंजा ग्रामीणों का दर्द, तत्काल नियुक्ति की मांग
भौंरा । एसआरआई समीक्षा के दौरान भौंरा पहुंचे जे. गोपाल कृष्ण आयुक्त, नर्मदापुरम संभाग एवं नरेंद्र सूर्यवंशी कलेक्टर, बैतूल के समक्ष प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भौंरा में लंबे समय से डॉक्टर की अनुपस्थिति का गंभीर मुद्दा प्रमुखता से उठा। ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से आयुक्त व कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए डॉक्टर की स्थायी नियुक्ति की मांग की। ग्रामीण अश्वनी दुबे, आनंद गुप्ता, अजय मिश्रा, दिलीप माधव, संजीव विजयकर ने बताया कि ग्राम पंचायत भौंरा जनपद पंचायत शाहपुर की सबसे बड़ी पंचायत है, जिसकी आबादी करीब 10 से 12 हजार के बीच है। इसके बावजूद यहां का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कई महीनों से डॉक्टर विहीन है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को मजबूरी में शाहपुर या बैतूल जाना पड़ता है, जिससे समय, पैसा और स्वास्थ्य तीनों पर असर पड़ रहा है। भौंरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के आदिवासी अंचल के लगभग 40 से 50 गांवों की स्वास्थ्य जरूरतों का मुख्य आधार है। यह केंद्र नेशनल हाईवे 47 से लगा होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार देने की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन डॉक्टर न होने से गंभीर मामलों में मरीजों को रेफर करना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
प्रसव सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई। ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाएं डिलीवरी के लिए भौंरा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचती हैं, परंतु डॉक्टर की अनुपस्थिति में पूरा दारोमदार स्टाफ नर्सों और कर्मचारियों पर ही है। जटिल प्रसव मामलों में जोखिम बढ़ जाता है और महिलाओं को दूर के अस्पतालों में भेजना पड़ता है।
ग्रामीणों ने यह भी अवगत कराया कि पूर्व में अस्थायी तौर पर डॉक्टर की व्यवस्था की गई थी, लेकिन वह टिकाऊ साबित नहीं हुई। कुछ समय पहले ब्रांड पर आए डॉक्टर 2 से 4 माह में ही केंद्र छोड़कर चले गए। वहीं, सीएमएचओ द्वारा लगभग एक वर्ष पहले डॉक्टर अभिनव शुक्ला की सप्ताह में दो दिन की ड्यूटी लगाई गई थी, पर बाद में वह व्यवस्था भी समाप्त हो गई। इसके चलते बीते करीब चार माह से स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह डॉक्टर विहीन है। इस मौके पर सरपंच मीरा धुर्वे ने कहा कि भौंरा जैसे बड़े क्षेत्र में डॉक्टर का न होना सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ है। हाईवे दुर्घटनाएं हों या प्रसव जैसी संवेदनशील सेवाएं, हर स्थिति में ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने शासन से स्थायी डॉक्टर की तत्काल नियुक्ति की मांग की।
जनपद सदस्य सुधीर नायक ने कहा कि यह समस्या केवल भौंरा की नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों की है, जिसे अब टाला नहीं जा सकता। डॉक्टर न होने से महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी होती है और कई बार जोखिम उठाकर दूर जाना पड़ता है।
ज्ञापन प्राप्त करते हुए आयुक्त जे. गोपाल कृष्ण ने मामले को गंभीर बताते हुए स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भौंरा में डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभागीय स्तर पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार प्रशासनिक स्तर पर ठोस निर्णय लेकर भौंरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को स्थायी डॉक्टर की सौगात मिलेगी, ताकि हजारों लोगों को अपने ही क्षेत्र में सुरक्षित और समय पर उपचार मिल सके।






