सारनी – वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड पाथाखेड़ा की तवा वन कोयला खदान का ट्रांसफार्मर बुधवार अलसुबह लोड बढ़ने के चलते चल गया। ट्रांसफार्मर जलते ही खदान में हड़कंप मच गया। दरअसल बिजली आपूर्ति बाधित होने के साथ खदान के जरूरी उपकरण भी बंद हो गए। सूत्रों ने बताया ब्रेकडाउन होते ही खदान के भीतर कार्य करने वाले कामगारों को सरफेस में बुला लिया गया। दरअसल ट्रांसफार्मर जलने से खदान में वेंटीलेशन की समस्या आ गई। भीषण गर्मी के दिनों में खदान के अंदर हवा नहीं पहुंचने से वातावरण गर्म हो गया।
इसके चलते लोग आनन-फानन में खदान के अंदर से बाहर निकल आए। सुबह 8 बजे जब प्रथम पाली में कार्य करने वाले ठेका मजदूर और कोयला कामगार खदान पर पहुंचे तो उन्हें पता चला कि ब्रेकडाउन है। इस बीच ठेका मजदूरों को खदान प्रबंधन द्वारा वापस कर दिया गया। जबकि कोयला कामगार खदान पर ही मौजूद रहे। हालांकि भूमिगत खदान में नहीं उतारा गया। ब्रेकडाउन की वजह से रात्रि व प्रथम पाली का करीब 500 टन कोयला उत्पादन प्रभावित होने का अनुमान है।
एक ही ट्रांसफार्मर पर था खदान का लोड
सुरक्षित कोयला उत्पादन करने के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली व देशभर में अपनी अलग पहचान बनाने वाली तवा वन कोयला खदान 2.5 एमवीए के महज एक ट्रांसफार्मर के भरोसे संचालित हो रही थी। जबकि खदान के सब-स्टेशन में दो ट्रांसफार्मर होने चाहिए। यहां दो ट्रांसफार्मर लगाने की व्यवस्था भी की गई है। लेकिन एक ही ट्रांसफार्मर के भरोसे पूरी खदान चल रही थी। बताया जा रहा है कि यह ट्रांसफार्मर भी 25 साल पुराना है। पुरानी तकनीक पर आधारित होने की वजह से सेफ्टी फीचर्स भी काम नहीं कर रहे थे।
मंगलवार देर रात ओवरलोड होने पर ट्रांसफार्मर जल गया। अब आपातकाल स्थिति में पाथाखेड़ा के सब स्टेशन का ट्रांसफार्मर निकालकर खदान में लगाया जा रहा है। ट्रांसफार्मर बदलने की संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ। जिससे कंपनी को लाखों रुपए का नुकसान होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
तीन भागों में बटी है खदान
पाथाखेड़ा की तवा वन कोयला खदान में तीन सेक्शन है। जहां से कोयला उत्पादन होता है। इसमें डब्ल्यू-7, क्रॉस कट और मेन डीप शामिल है। इस खदान में करीब 800 कर्मचारी कार्यरत है। इसमें से जनरल और फर्स्ट में लगभग 350 कर्मचारी कार्य पर आते हैं। ब्रेकडाउन की वजह से कुछ कर्मचारियों को वापस कर दिया गया।जबकि कुछ को डेजिग्नेशन से हटकर अलग कार्य पर भेज दिया गया। इस खदान से प्रतिदिन करीब 1000 से 1200 कोयला उत्पादन होता है।ब्रेकडाउन की वजह से 500 से 700 मेट्रिक टन कोयला उत्पादन प्रभावित होने का अनुमान है।





