Asha Bhosle और R. D. Burman की लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। दोनों की पहली मुलाकात साल 1956 में एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में हुई थी। उस समय आशा जी एक स्थापित सिंगर थीं, जबकि पंचम दा सिर्फ 17 साल के थे। यहीं से इस अनोखे रिश्ते की शुरुआत हुई।
एक ऑटोग्राफ से जगा प्यार
पंचम दा, जो S. D. Burman के बेटे थे, आशा जी के बहुत बड़े फैन थे। उन्होंने रेडियो पर उनके गाने सुनकर उनसे मिलने का सपना देखा था। जब मौका मिला, तो उन्होंने हिम्मत करके आशा जी से एक ऑटोग्राफ मांगा। वहीं से उनके दिल में प्यार की चिंगारी जल उठी, हालांकि उस वक्त आशा जी ने उन्हें सिर्फ एक साधारण लड़का समझा।
मुश्किल दौर और फिर नई शुरुआत
आशा भोसले की पर्सनल लाइफ आसान नहीं रही। उनकी पहली शादी में काफी परेशानियां आईं और आखिरकार 1960 में उनका रिश्ता टूट गया। इस मुश्किल समय में उन्होंने अपने करियर पर ध्यान दिया। इसी दौरान उनकी मुलाकात फिर से पंचम दा से हुई और दोनों के बीच दोस्ती गहरी होती गई।
संगीत बना प्यार की डोर
दोनों की जोड़ी ने कई सुपरहिट गाने दिए। खासकर फिल्म Teesri Manzil का गाना “आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा” आज भी याद किया जाता है। काम के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उनका रिश्ता दोस्ती से प्यार में बदल गया।
20 साल का इंतजार और शादी
पंचम दा ने अपने प्यार को पाने के लिए करीब 20 साल इंतजार किया। आखिरकार उन्होंने आशा जी को शादी के लिए प्रपोज किया। उस समय आशा जी 47 साल की थीं, लेकिन दोनों ने समाज की परवाह किए बिना शादी कर ली। उम्र का फर्क भी उनके प्यार के आगे छोटा पड़ गया।
आज भी जिंदा है ये प्रेम कहानी
Asha Bhosle और R. D. Burman की ये लव स्टोरी आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है। एक ऑटोग्राफ से शुरू हुई ये कहानी सच्चे प्यार की मिसाल बन गई, जो यह सिखाती है कि सच्चा प्यार वक्त और हालात से ऊपर होता है।





