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ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ एकजुट हुए नागरिक, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
नरसिंहपुर। शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और डीजे के बेलगाम शोर से परेशान प्रबुद्ध नागरिकों ने अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को जिले के विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, व्यावसायिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्थानीय नरसिंह मंदिर प्रागण में एक आवश्यक बैठक की। बैठक के पश्चात सामूहिक रूप से कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया।
डीजे के शोर से जा रही जान, पूर्व पार्षद की मौत का दिया हवाला
ज्ञापन में नागरिकों ने एक गंभीर घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि हाल ही में एक धार्मिक जुलूस के दौरान डीजे के अत्यधिक शोर के कारण पटेल वार्ड के पूर्व पार्षद सूरज साहू की हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से मृत्यु हो गई थी। नागरिकों का कहना है कि डीजे संचालक आपसी प्रतिस्पर्धा के चक्कर में निर्धारित सीमा से कई गुना तेज आवाज में संगीत बजाते हैं, जिससे राहगीरों और आम जनता के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के नियमों की उड़ रही धज्जियां
प्रतिनिधियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों और मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 के बावजूद स्थानीय स्तर पर नियमों का पालन नहीं कराया जा रहा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि:
रात्रि 10:00 बजे के बाद ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया जाए।
डीजे संचालकों से नियमों के पालन के लिए लिखित सहमति ली जाए।
नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक और दंडात्मक कार्यवाही की जाए।
आयोजनों के दौरान जिला प्रशासन की कड़ी निगरानी सुनिश्चित हो।
प्रशासन को चेतावनी जनभावनाओं का करें सम्मान
बैठक में उपस्थित नागरिकों ने एकमत होकर कहा कि ध्वनि प्रदूषण अब एक सामाजिक बुराई का रूप ले चुका है। यदि प्रशासन ने इस जटिल समस्या का समय रहते समाधान नहीं निकाला, तो नागरिक सख्त कदम उठाने पर विवश होंगे।
इस अवसर पर शहर के अनेक अधिवक्ता, पार्षद, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न समाजों के अध्यक्ष प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।





