आखिरी वक्त पर टला इस्तीफा, बढ़ा सस्पेंस
बिहार की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब तय समय पर इस्तीफा नहीं हुआ। सुबह 8:40 बजे का समय तय था, लेकिन ऐन मौके पर पूरा मामला ठंडा पड़ गया। विधानसभा सचिवालय ने पहले सूचना दी, फिर अचानक प्रक्रिया रोक दी गई। इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी।
विधानसभा में पहले से थी पूरी तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर खास बात ये रही कि विधानसभा में पहले से जबरदस्त तैयारी की गई थी। छुट्टी के दिन भी विधानसभा खोली गई, अधिकारी मौजूद थे और स्पीकर भी दिल्ली से पटना पहुंचे थे। इससे साफ था कि कुछ बड़ा होने वाला था, लेकिन आखिरी समय में सब रुक गया।
नियमों के अनुसार इस्तीफा देना था जरूरी
विधानसभा के नियमों के मुताबिक, अगर कोई विधायक संसद या विधान परिषद के लिए चुना जाता है तो उसे 14 दिन के अंदर अपनी सीट छोड़नी होती है। इसी नियम के तहत 30 मार्च आखिरी तारीख मानी जा रही थी। ऐसे में इस्तीफा न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
नीतीश कुमार पर टिकी सबकी नजर
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा नजरें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर टिकी हैं। उनके अगले कदम को लेकर सस्पेंस और गहरा गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह देरी कोई सामान्य प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक रणनीति हो सकती है।
गजट नोटिफिकेशन बना असली खेल
सूत्रों की मानें तो अब तक आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। यही वजह बताई जा रही है कि इस्तीफा प्रक्रिया को रोका गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक गजट नहीं आएगा, तब तक नई तारीख तय नहीं होगी। यानी पूरा खेल अब कागजी प्रक्रिया और टाइमिंग पर टिका हुआ है।
कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में यह पूरा मामला सीधा-साधा नहीं दिख रहा। देसी भाषा में कहें तो “कुछ तो पक रहा है अंदर ही अंदर।” अब देखना ये है कि अगला कदम क्या होता है और इसका असर राज्य की सियासत पर कितना पड़ता है।
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