ईरान-इजराइल तनाव के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है—आखिर ईरान भारत पर इतना भरोसा क्यों करता है? हाल ही में ईरान के राजदूत ने भारत को ऐसा देश बताया जो इस विवाद में शांति ला सकता है। देसी अंदाज में कहें तो भारत “दोनों तरफ की सुनने वाला समझदार खिलाड़ी” बन चुका है।
मजबूत अर्थव्यवस्था और स्वतंत्र नीति
भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। सबसे खास बात इसकी स्वतंत्र विदेश नीति है। भारत किसी के दबाव में आकर फैसले नहीं बदलता। चाहे अमेरिका के प्रतिबंध हों या ग्लोबल दबाव—भारत ने हमेशा अपने हिसाब से फैसले लिए हैं। यही बात ईरान को भरोसा दिलाती है कि भारत निष्पक्ष रहेगा।
अमेरिका और इजराइल से भी मजबूत रिश्ते
भारत की सबसे बड़ी ताकत ये है कि उसके रिश्ते सिर्फ ईरान से ही नहीं, बल्कि अमेरिका और इजराइल से भी काफी मजबूत हैं। भारत को इजराइल से डिफेंस और टेक्नोलॉजी मिलती है, वहीं अमेरिका के साथ भी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप है। यानी भारत दोनों पक्षों से बात कर सकता है—और यही उसे एक परफेक्ट मीडिएटर बनाता है।
चाबहार पोर्ट: दोस्ती की मजबूत कड़ी
ईरान में बन रहा चाबहार पोर्ट भारत और ईरान के रिश्तों का बड़ा उदाहरण है। ये प्रोजेक्ट भारत के लिए अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक पहुंचने का अहम रास्ता है। खास बात ये है कि अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत ने इस प्रोजेक्ट को जारी रखा। इससे ईरान को लगा कि भारत लंबी रेस का साथी है।
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मुश्किल वक्त में भी साथ नहीं छोड़ा
जब अमेरिका ने ईरान पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे, तब भी भारत ने पूरी तरह दूरी नहीं बनाई। व्यापार और बातचीत जारी रखी। ईरान इसे “सच्ची दोस्ती” मानता है। देसी भाषा में बोलें तो “मुश्किल समय में जो साथ दे, वही असली दोस्त होता है।”





