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2026 में पापमोचनी एकादशी और मीन संक्रांति का दुर्लभ संयोग

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साल 2026 में Papmochani Ekadashi और Pisces Sankranti एक ही दिन पड़ रहे हैं। यह शुभ संयोग रविवार, 15 मार्च 2026 को बनेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जबकि संक्रांति सूर्य देव से जुड़ी होती है। ऐसे में इस दिन विष्णु जी और सूर्य देव दोनों की पूजा का विशेष फल मिलता है। भक्तों के लिए यह दिन आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा पाने का सुनहरा मौका माना जा रहा है।

पापमोचनी एकादशी का महत्व और कथा

पापमोचनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है। जैसा नाम वैसा काम – यह व्रत पापों को मोचन यानी समाप्त करने वाला माना जाता है। शास्त्रों में लिखा है कि इस दिन व्रत रखने से अनजाने में हुए पाप भी कट जाते हैं। श्रद्धालु दिनभर संयम रखते हैं, फलाहार करते हैं और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं। गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और रात में दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है। देसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से किया गया व्रत मन को शांति और जीवन में सुख-समृद्धि देता है।

मीन संक्रांति का धार्मिक महत्व

जब सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब मीन संक्रांति मनाई जाती है। यह फाल्गुन से चैत्र मास के बदलाव का संकेत भी है। इस दिन स्नान, दान और जप का बड़ा महत्व बताया गया है। खासकर तिल, गुड़, कपड़े और अन्न का दान पुण्यकारी माना जाता है। सुबह-सुबह नदी या पवित्र जल से स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य देना बहुत शुभ होता है। आदित्य मंत्र का जाप करने से आत्मबल बढ़ता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

शुभ मुहूर्त और पारण का सही समय

पापमोचनी एकादशी तिथि 14 मार्च 2026 को सुबह 08:10 बजे से शुरू होकर 15 मार्च 2026 को सुबह 09:16 बजे तक रहेगी। व्रत का पारण 16 मार्च 2026 को सुबह 05:58 से 08:22 बजे के बीच करना श्रेष्ठ रहेगा। वहीं मीन संक्रांति का क्षण 15 मार्च को रात 01:09 बजे होगा। पुण्यकाल सुबह 06:46 से दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा, जबकि महापुण्य काल 06:46 से 08:48 बजे तक सबसे उत्तम माना गया है। इसी समय स्नान और दान करना बेहद फलदायी रहेगा।

कैसे पाएँ डबल पुण्य का लाभ

एकादशी का व्रत और संक्रांति का स्नान जब एक साथ आए, तो इसे डबल पुण्य कमाने का मौका माना जाता है। एकादशी पर चावल खाना वर्जित है, इसलिए केवल फलाहार करें। संक्रांति पर खिचड़ी दान करने की परंपरा है, लेकिन इस दिन खुद सेवन न करें। जरूरतमंदों को दान दें और पूरे दिन श्रद्धा, संयम और नियम का पालन करें। देसी कहावत है – “मन साफ तो सब माफ।” इसलिए सच्चे मन से पूजा करें, तभी इस दुर्लभ संयोग का पूरा लाभ मिलेगा।

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