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भारत में नए IT नियम 2026: AI कंटेंट पर सख्त लगाम, 3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक सामग्री

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भारत सरकार ने डिजिटल दुनिया में बढ़ते AI कंटेंट पर अब कड़ी नजर रखने का फैसला कर लिया है। Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) ने Information Technology Act, 2000 की धारा 87 के तहत नए संशोधन लागू किए हैं। इन नियमों की अधिसूचना 10 फरवरी को जारी हुई थी और ये 20 फरवरी से प्रभावी हो गए हैं। अब सोशल मीडिया पर AI से बनी फोटो, वीडियो या ऑडियो डालना है तो साफ-साफ बताना पड़ेगा कि यह AI-Generated है।

AI कंटेंट को अब करना होगा साफ-साफ लेबल

सरकार ने साफ कर दिया है कि जो भी कंटेंट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाया गया है, उसे पोस्ट करते समय लेबल लगाना अनिवार्य होगा। यानी अगर फोटो, वीडियो या ऑडियो AI से तैयार है, तो यूज़र को खुद बताना पड़ेगा। देसी भाषा में कहें तो अब “जुगाड़ से बनाया” कंटेंट छुपाकर नहीं चलेगा। यूज़र की जिम्मेदारी होगी कि वह असली और नकली में फर्क बताए।

3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट

पहले सोशल मीडिया कंपनियों को 36 घंटे का समय मिलता था, लेकिन अब नियम सख्त हो गए हैं। किसी भी अवैध या आपत्तिजनक पोस्ट की शिकायत मिलने पर प्लेटफॉर्म को सिर्फ 3 घंटे के अंदर उसे हटाना होगा। अगर मामला न्यूडिटी या डीपफेक पोर्न जैसा है तो सिर्फ 2 घंटे में हटाना जरूरी है। देरी हुई तो कंपनी की कानूनी सुरक्षा खत्म हो सकती है।

मेटाडेटा से छेड़छाड़ पर पूरी तरह रोक

नए नियमों के तहत मेटाडेटा से छेड़छाड़ करना भी गैरकानूनी माना जाएगा। यानी फोटो या वीडियो की असली जानकारी छुपाकर गुमराह करना अब भारी पड़ सकता है। ऐसा करने पर अकाउंट सस्पेंड होगा और आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है। सरकार का मकसद साफ है—फेक न्यूज और डीपफेक पर लगाम।

सेक्शन 79 की कानूनी ढाल भी जा सकती है

अगर सोशल मीडिया कंपनियां तय समय में कंटेंट नहीं हटातीं, तो उन्हें Section 79 of the Information Technology Act के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी। मतलब साफ है—अब प्लेटफॉर्म भी जिम्मेदारी से काम करें, वरना मुश्किल में पड़ सकते हैं।

पुलिस को मिलेगी सख्त कार्रवाई की ताकत

नए नियमों के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों को स्पष्ट कानूनी आधार मिल गया है। AI-Generated और सिंथेटिक कंटेंट (एडिटेड ओरिजिनल कंटेंट) की परिभाषा तय कर दी गई है, जिससे अब दोषियों पर सीधे आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया जा सकेगा। साथ ही कंपनियों को AI फिल्टर लगाने होंगे ताकि चाइल्ड एब्यूज और डीपफेक जैसी गड़बड़ियों को पहले ही रोका जा सके।

कुल मिलाकर, अब सोशल मीडिया पर मनमानी नहीं चलेगी। जो भी पोस्ट करें, सोच-समझकर करें, वरना कानूनी पचड़ा झेलना पड़ सकता है।

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