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होलाष्टक 2026: क्या है, कब से कब तक और क्यों माना जाता है अशुभ?

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होली आने से पहले के आठ दिन खास माने जाते हैं, जिन्हें होलाष्टक कहा जाता है। साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च 2026 तक रहेगा। 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी। आइए आसान देसी हिंदी में समझते हैं कि होलाष्टक क्या है, इसे अशुभ क्यों कहा जाता है और इन दिनों में क्या करें, क्या नहीं।

होलाष्टक क्या होता है?

‘होलाष्टक’ दो शब्दों से मिलकर बना है – होली और अष्टक। अष्टक मतलब आठ। यानी होली से पहले के आठ दिन। पंचांग के अनुसार यह फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से शुरू होकर होलिका दहन तक चलता है। इन आठ दिनों को साधना, संयम और भक्ति का समय माना जाता है। बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि ये दिन मन को काबू में रखने और भगवान का ध्यान करने के होते हैं।

होलाष्टक 2026 कब से कब तक है?

साल 2026 में होलाष्टक की शुरुआत मंगलवार, 24 फरवरी से होगी। यह 3 मार्च 2026 तक चलेगा। इसी दिन होलिका दहन होगा और 4 मार्च 2026 को धुलेंडी यानी रंगों की होली खेली जाएगी। हां, जगह के हिसाब से तिथियों में थोड़ा बहुत फर्क हो सकता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देख लेना बढ़िया रहता है।

होलाष्टक अशुभ क्यों माना जाता है?

हिंदू मान्यता के अनुसार इन दिनों को शुभ कामों के लिए ठीक नहीं माना जाता। एक वजह भक्त प्रह्लाद की कथा है, जिन पर उनके पिता हिरण्यकशिपु ने आठ दिन तक अत्याचार किए। दूसरी कथा कामदेव और भगवान शिव से जुड़ी है, जब शिव जी ने क्रोध में आकर कामदेव को भस्म कर दिया। इन घटनाओं के कारण इन आठ दिनों को तप, त्याग और धैर्य का समय माना गया है, ना कि शहनाई बजाने का।

होलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिए?

इन दिनों में शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नया मकान खरीदना, गाड़ी लेना या नया बिजनेस शुरू करना टाल दिया जाता है। नामकरण, मुंडन या जनेऊ जैसे संस्कार भी नहीं किए जाते। लोग कहते हैं कि इन कामों का शुभ मुहूर्त होलाष्टक के बाद ही देखना अच्छा रहता है।

होलाष्टक में क्या करना चाहिए?

होलाष्टक के दिन भजन-कीर्तन, मंत्र जाप और पूजा-पाठ करना शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु और हनुमान जी की आराधना खास फलदायी बताई गई है। दान-पुण्य करना, जरूरतमंदों की मदद करना और घर में सकारात्मक माहौल रखना अच्छा होता है। साथ ही, होली की तैयारी करें, घर की सफाई करें और पुराने गिले-शिकवे मिटाकर त्योहार का स्वागत करें।

होलाष्टक हमें यही सिखाता है कि जीवन में धैर्य रखें, संयम बरतें और बुराई पर अच्छाई की जीत को याद रखें।

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