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Fatty Liver का इलाज अब स्प्रे से? IIT Kanpur की खोज से जगी नई उम्मीद

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Fatty Liver: भारत में फैटी लिवर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर मेट्रो शहरों में यह बीमारी आम होती जा रही है। अनियमित लाइफस्टाइल, जंक फूड, तला-भुना खाना और शराब का ज्यादा सेवन इसकी बड़ी वजह माने जाते हैं। अब तक इसका कोई पक्का इलाज नहीं था, सिर्फ डाइट और एक्सरसाइज ही सहारा था। लेकिन अब Indian Institute of Technology Kanpur यानी IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने एक खास स्प्रे तैयार किया है, जो फैटी लिवर के इलाज में गेमचेंजर साबित हो सकता है।

IIT कानपुर की बड़ी खोज

IIT कानपुर के बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर Ashok Kumar और उनकी टीम ने यह इनोवेटिव स्प्रे थेरेपी विकसित की है। यह तकनीक रीजेनेरेटिव मेडिसिन पर आधारित है, यानी यह खराब हो चुकी लिवर कोशिकाओं को दोबारा ठीक करने में मदद करती है।

इस रिसर्च को देश के वैज्ञानिक क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

स्प्रे कैसे करेगा काम?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह स्प्रे हेल्दी सेल्स से निकाले गए एक्सोसोम्स और खास पॉलिमर सॉल्यूशन को मिलाकर बनाया गया है। इसे लेप्रोस्कोपिक यानी छोटी सर्जरी के जरिए लिवर पर स्प्रे किया जाता है।

शरीर के अंदर जाते ही यह लिक्विड जेल में बदल जाता है और डैमेज्ड लिवर सेल्स की मरम्मत शुरू कर देता है। साथ ही फैट जमा होने की प्रक्रिया को भी रोकता है।

कितने दिन में दिखेगा असर?

रिसर्च टीम का दावा है कि इस स्प्रे का असर एक हफ्ते में दिखना शुरू हो जाता है। करीब 2-3 महीने में लिवर की सेहत पूरी तरह सुधर सकती है। शुरुआती परीक्षण चूहों पर किए गए, जहां इसके नतीजे काफी सकारात्मक रहे।

अब Indian Council of Medical Research ने इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी दे दी है। उम्मीद है कि 1-2 साल में ट्रायल पूरे हो जाएंगे।

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कीमत और उपलब्धता कैसी होगी?

प्रोफेसर अशोक कुमार के अनुसार, यह स्प्रे भारत में बने प्राकृतिक पॉलिमर से तैयार किया गया है, इसलिए इसकी लागत कम होगी। कोशिश यही है कि आम मरीज भी इसे आसानी से खरीद सकें।

अगर क्लीनिकल ट्रायल सफल रहे, तो यह थेरेपी सिर्फ फैटी लिवर ही नहीं, बल्कि अन्य अंगों की बीमारियों के इलाज में भी नई राह खोल सकती है। देसी जुबान में कहें तो यह खोज लाखों मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकती है।

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