भारत के प्रसिद्ध योग गुरु बाबा रामदेव ने हाल ही में सोशल मीडिया पर देश की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक सोच को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी मानसिकता नहीं बदलेंगे तो देश का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। आज करोड़ों रुपये बच्चों की पढ़ाई और इलाज पर खर्च हो रहे हैं, लेकिन अगर समाज नशे, दिखावे और गलत आदतों में फंसा रहेगा तो असली विकास संभव नहीं है। हमें अपनी सोच में बदलाव लाना ही होगा।
शिक्षा पर हो रहा है लाखों करोड़ का खर्च, लेकिन सोच में बदलाव जरूरी
बाबा रामदेव ने बताया कि देश में लगभग ₹25 लाख करोड़ रुपये बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन अगर बच्चे मोबाइल, टीवी और बेकार की चीजों में समय गंवाते रहेंगे तो इतना बड़ा निवेश भी बेकार हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अंधविश्वास, फिजूल खर्ची और झूठी शान-शौकत छोड़कर समझदारी से जीवन जीना होगा। देश तभी आगे बढ़ेगा जब लोग जिम्मेदारी समझेंगे।
बच्चों को मोबाइल और सोशल मीडिया से रखें दूर
आजकल छोटे-छोटे बच्चे घंटों मोबाइल पर रील्स और बेकार वीडियो देखते रहते हैं। बाबा रामदेव ने कहा कि रोज के 2-3 घंटे ऐसे ही बर्बाद हो जाते हैं। माता-पिता को चाहिए कि बचपन से ही बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखें। घर में ऐसा माहौल बने जहाँ संस्कार, अनुशासन और अच्छी परवरिश पर जोर हो। सिर्फ किताबों की पढ़ाई नहीं, बल्कि जीवन जीने की सीख भी जरूरी है।
सरकारी स्कूलों को बनाना होगा वर्ल्ड क्लास
उन्होंने कहा कि विकसित देशों में बच्चे गर्व से सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। भारत में भी सरकारी स्कूलों की क्वालिटी को इतना बढ़ाना होगा कि लोग प्राइवेट स्कूल छोड़कर वहां एडमिशन कराएं। मास्टरों की जिम्मेदारी, बेहतर सुविधाएं और आधुनिक तकनीक का सही इस्तेमाल जरूरी है। शिक्षा ऐसी हो जो बच्चों को आत्मनिर्भर बनाए, सिर्फ नौकरी ढूंढने वाला नहीं बल्कि नौकरी देने वाला बनाए।
आत्मनिर्भर भारत के लिए बदलनी होगी सोच
बाबा रामदेव ने साफ कहा कि भारत को सिर्फ विदेशी सामान खरीदने वाला देश नहीं बनना चाहिए। हमें खुद नई चीजें बनानी होंगी, इनोवेशन करना होगा और देसी उद्योग को बढ़ावा देना होगा। नई टेक्नोलॉजी और पुरानी परंपराओं का संगम ही असली ताकत है। अगर हम अपनी शिक्षा, जीवनशैली और सोच में सुधार लाएं, तो भारत सच में आत्मनिर्भर और शक्तिशाली राष्ट्र बन सकता है।
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