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80 साल बाद बदला सत्ता का केंद्र, PM मोदी ने किया ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन

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देश की सत्ता व्यवस्था में करीब 80 साल बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नए पीएमओ कॉम्प्लेक्स ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया। अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट (NSCS) और कैबिनेट सेक्रेटेरिएट एक ही परिसर में काम करेंगे। सरकार का कहना है कि इससे कामकाज में तेजी आएगी और मंत्रालयों के बीच तालमेल मजबूत होगा।

साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ तक का सफर

सरकार ने सिर्फ इमारत ही नहीं बदली, बल्कि नामों में भी बड़ा परिवर्तन किया है। साउथ ब्लॉक को अब ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है। सेंट्रल सेक्रेटेरिएट अब ‘कर्तव्य भवन’ कहलाएगा। राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ और रेस कोर्स रोड का नाम ‘लोक कल्याण मार्ग’ कर दिया गया है। वहीं राजभवन/राज निवास को अब ‘लोक भवन’ और ‘लोक निवास’ कहा जाएगा।

सरकार का कहना है कि ये बदलाव सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि सोच और कार्यसंस्कृति का भी है।

एक ही कैंपस में बड़े-बड़े दफ्तर

अब तक कई अहम मंत्रालय और सरकारी दफ्तर सेंट्रल विस्टा इलाके में अलग-अलग जर्जर इमारतों में चल रहे थे। इससे कर्मचारियों को काम करने में दिक्कत आती थी और मेंटेनेंस पर भी ज्यादा खर्च होता था।

नया ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स इन सब समस्याओं का हल बताकर पेश किया गया है। यहां पीएमओ, NSCS और कैबिनेट सेक्रेटेरिएट एक ही जगह शिफ्ट हो गए हैं। इससे फैसले लेने की प्रक्रिया तेज होगी और फाइलें इधर-उधर भटकेंगी नहीं।

डिजिटल सुविधाओं से लैस ‘कर्तव्य भवन’

कर्तव्य भवन-1 और 2 में आधुनिक डिजिटल टेक्नोलॉजी से लैस ऑफिस बनाए गए हैं। यहां सेंट्रलाइज्ड रिसेप्शन, पब्लिक इंटरैक्शन एरिया और बेहतर मीटिंग स्पेस की सुविधा दी गई है।

सरकार का दावा है कि इससे मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय होगा और जनता से सीधा संवाद भी आसान बनेगा। खास बात यह है कि पूरी इमारत को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है, यानी पर्यावरण के लिहाज से भी यह इमारत खास है।

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ओपन फ्लोर मॉडल वाला नया PMO

नया प्रधानमंत्री कार्यालय अब पुराने बंद कमरों और ऊंची दीवारों वाले सिस्टम से अलग है। इसे ओपन-फ्लोर मॉडल पर बनाया गया है, जहां कर्मचारी आपस में बेहतर तालमेल से काम कर सकें।

प्रधानमंत्री के निजी कक्ष और बड़े मीटिंग रूम भी आधुनिक तरीके से तैयार किए गए हैं, ताकि विदेशी प्रतिनिधिमंडल और राष्ट्राध्यक्षों के साथ हाई-लेवल बैठकें आसानी से हो सकें।

कुल मिलाकर, ‘सेवा तीर्थ’ को सरकार ने नए भारत की कार्यसंस्कृति और तेज प्रशासन की मिसाल के तौर पर पेश किया है। अब देखना होगा कि यह नया सत्ता केंद्र कितनी तेजी से फैसलों को जमीन पर उतार पाता है।

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