India Bangladesh Relations: बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव आ चुका है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की जीत के बाद अब देश में तारीक रहमान का दौर शुरू हो गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारत-बांग्लादेश रिश्ते किस दिशा में जाएंगे और क्या शेख हसीना की घर वापसी संभव होगी?
1. BNP की वापसी और नई सियासी हवा
करीब 20 साल बाद BNP फिर से सत्ता में लौटी है। तारीक रहमान के प्रधानमंत्री बनने से बांग्लादेश की राजनीति में नई हलचल है। पहले जब पार्टी की सरकार थी, तब भारत से रिश्ते ठीक-ठाक थे, लेकिन पिछले डेढ़ साल में हालात बिगड़ गए। खासकर शेख हसीना को भारत में शरण मिलने के बाद दोनों देशों के बीच तनातनी बढ़ी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नई सरकार पुरानी कड़वाहट को भुलाकर आगे बढ़ेगी या नहीं।
2. क्या सुधरेंगे भारत-बांग्लादेश संबंध?
भारत ने चुनाव नतीजों के तुरंत बाद तारीक रहमान को बधाई देकर साफ संकेत दे दिया कि वह रिश्तों को पटरी पर लाना चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सहयोग और मजबूत साझेदारी की बात कही है। भारत की प्राथमिकता है कि सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और व्यापार जैसे मुद्दों पर मिलकर काम हो। अगर नई सरकार सकारात्मक रुख अपनाती है, तो दोनों देशों के बीच फिर से भरोसा बन सकता है।
3. शेख हसीना की घर वापसी पर सस्पेंस
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शेख हसीना बांग्लादेश लौट पाएंगी? उनकी वापसी पूरी तरह नई सरकार के रवैये पर निर्भर करेगी। अगर राजनीतिक माहौल नरम होता है और कानूनी अड़चनें दूर होती हैं, तो रास्ता खुल सकता है। लेकिन अगर सियासी टकराव जारी रहा, तो उनकी वापसी मुश्किल दिखती है। फिलहाल यह मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों पर भी असर डाल सकता है।
4. पाकिस्तान-चीन फैक्टर कितना भारी?
दक्षिण एशिया की राजनीति में पाकिस्तान और चीन का रोल भी अहम है। अगर बांग्लादेश इन देशों के साथ ज्यादा नजदीकी बढ़ाता है, तो भारत के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है। माना जा रहा है कि अगर कोई पाकिस्तान-चीन-बांग्लादेश गठजोड़ मजबूत हुआ, तो क्षेत्रीय संतुलन बदल सकता है और भारत की रणनीति पर असर पड़ेगा।
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5. आगे का रास्ता: टकराव या तालमेल?
अब गेंद तारीक रहमान सरकार के पाले में है। अगर वह व्यवहारिक और संतुलित विदेश नीति अपनाते हैं, तो भारत-बांग्लादेश रिश्ते फिर से मजबूत हो सकते हैं। व्यापार, कनेक्टिविटी और सुरक्षा सहयोग दोनों देशों के हित में है। देसी भाषा में कहें तो “दोनो तरफ से एक कदम बढ़ेगा, तभी दोस्ती पक्की होगी।” आने वाले महीनों में साफ हो जाएगा कि यह नया दौर रिश्तों में मिठास लाता है या फिर खटास बरकरार रहती है।




